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Gen Alpha के छात्रों ने उठाई आवाज, कहीं सड़क तो कहीं खाना-पानी की समस्या पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर और उत्तराखंड के खटीमा में स्कूली छात्रों के प्रदर्शन ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमीरपुर में बच्चे स्कूल तक पक्की सड़क की मांग को लेकर तिरंगा लेकर करीब 5 किलोमीटर पैदल चले और कलेक्ट्रेट पहुंच गए। वहीं खटीमा में छात्रों ने खराब खाना, दूषित पानी और गंदे शौचालयों की शिकायत को लेकर स्कूल परिसर में धरना दिया।

हमीरपुर में ग्राम पंचायत चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा इलाके के छात्र लंबे समय से खराब सड़क से परेशान थे। बारिश के दौरान कच्चे रास्ते पर कीचड़ जमा होने से बच्चों को स्कूल जाने में काफी परेशानी होती थी। इसी समस्या को लेकर छात्र और ग्रामीण तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और सड़क निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारी डीएम गेट पर बैठ गए और कहा कि जब तक सड़क का काम शुरू नहीं होता, वे वहां से नहीं हटेंगे।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की NOC मिल चुकी है और जल्द काम शुरू कराया जाएगा। इस सड़क के निर्माण पर करीब 1 करोड़ 81 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यानी छात्रों के प्रदर्शन के बाद उनकी मुख्य मांग पर प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया है।

दूसरी ओर, खटीमा के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में करीब 400 छात्र पढ़ते हैं। यहां छात्रों ने भोजन की खराब गुणवत्ता, दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी जैसी समस्याओं को लेकर विरोध किया। छात्रों का आरोप था कि इन समस्याओं की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन पर्याप्त सुधार नहीं हुआ। प्रदर्शन में कुछ अभिभावक भी छात्रों के साथ शामिल हुए।

मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचने के बाद उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया। इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्य को हटाने का आदेश दिया गया। व्यवस्था में सुधार का भरोसा मिलने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने धरना समाप्त कर दिया। दोनों घटनाओं ने यह दिखाया है कि स्कूली छात्र अब अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने खुलकर आवाज उठा रहे हैं।

इन दोनों मामलों को Gen Alpha के छात्रों की बढ़ती जागरूकता के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। हमीरपुर में छात्रों ने शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने के लिए सड़क की मांग की, जबकि खटीमा में छात्रों ने स्कूल में बेहतर भोजन, साफ पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर आवाज उठाई। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रदर्शन के दौरान किए गए आश्वासनों को जमीन पर जल्द लागू किया जाए।

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