ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में एक गंभीर सड़क हादसे ने फिर से शहर की सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर चर्चा तेज कर दी है। यहां 27 वर्ष के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत उस गहरे गड्ढे में पानी में डूबने से हो गई, जहां कोई सुरक्षा संकेत या बैरिकेड नहीं था। हादसे से पहले उसी जगह एक ट्रक ड्राइवर गुरविंदर सिंह भी दुर्घटना का शिकार हो चुके थे, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।
ट्रक चालक गुरविंदर सिंह ने बताया कि सड़क से महज 10 कदम आगे एक गहरा नाला था, जिस पर कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेड नहीं लगाया गया था। रात लगभग 12:30 बजे उनके वाहन के पहिए नाले में फँस गए और ट्रक पटकाट गिर गया। गुरविंदर को गर्दन तक पानी में गिरते हुए भागना पड़ा, लेकिन वे समय रहते कूदकर सुरक्षित निकल गए। उन्होंने कहा कि रात को करीब चार बजे स्थानीय लोगों की मदद से वे बाहर आ पाए, लेकिन पुलिस व प्रशासन की ओर से तुरंत मदद नहीं की गई।
करीब 18 दिन बाद, इसी जगह युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार में कोहरे और कमजोर मार्ग संकेत की वजह से नियंत्रण खो बैठे। उनकी कार एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के बेसमेंट के गहरे पानी में गिर गई, जिसमें वे डूब गए। युवराज ने गाड़ी से निकलकर मदद की गुहार भी लगाई, परन्तु बचाव कार्य काफी देर तक बेनतीजा रहा।
घटना की मुख्य वजहों में शामिल हैं:
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कोहरा और कम विजिबिलिटी: युवा इंजीनियर को आगे का रास्ता स्पष्ट नहीं दिखा।
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सुरक्षा प्रबंधों का अभाव: गड्ढे पर नो चेतावनी संकेत और बैरिकेड न होने से कई वाहन इस जगह गिर चुके हैं।
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बचाव कार्य में देरी: स्थानीय लोगों और ड्राइवरों ने कई बार कहा कि प्रशासन और पुलिस समय पर सक्रिय नहीं हुए, जिससे मौत टल सकती थी।
इस दर्दनाक हादसे ने सड़क सुरक्षा, चेतावनी संकेतों की कमी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जहां एक ओर एक ट्रक ड्राइवर भयानक स्थिति से बच गया, वहीं युवराज मेहता का निधन शहर के लिए दुख और चिंता का विषय बन गया है।
