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असम में फिर लौटी सरमा सरकार, दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा; शपथ समारोह में पहुंचे पीएम मोदी

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असम की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। बीजेपी नेता Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभाल ली। गुवाहाटी में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे। इस समारोह को पूर्वोत्तर की राजनीति में बीजेपी की ताकत के बड़े प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

हाल ही में हुए 2026 असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने शानदार जीत दर्ज की थी। 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए गठबंधन को 102 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि अकेले बीजेपी ने 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से नेता चुना गया और राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया।

शपथ ग्रहण समारोह में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। नई कैबिनेट में भाजपा के साथ-साथ सहयोगी दल AGP और BPF को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। अंजना नियोग, अतुल बोरा, रमेश्वर तेली और चरण बोरो जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ संकेत दिए थे कि उनकी सरकार भूमि अतिक्रमण, अवैध घुसपैठ और विकास परियोजनाओं पर पहले से ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएगी। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आने वाले वर्षों में राज्य में पांच लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। यह बयान चुनाव के दौरान भी चर्चा में रहा था और बीजेपी ने इसे असम की पहचान और संसाधनों की रक्षा से जोड़कर पेश किया था।

प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने इस शपथ ग्रहण समारोह को राष्ट्रीय महत्व का बना दिया। बीजेपी नेतृत्व पूर्वोत्तर भारत में अपनी लगातार मजबूत होती पकड़ को बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में असम बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर का सबसे अहम राजनीतिक केंद्र बनकर उभरा है और हिमंत बिस्वा सरमा को इस विस्तार का मुख्य चेहरा माना जाता है।

हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। कभी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाने वाले सरमा ने राहुल गांधी से मतभेदों के बाद पार्टी छोड़ दी थी और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने पार्टी को असम में मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि संगठन क्षमता, आक्रामक चुनावी रणनीति और तेज प्रशासनिक फैसलों ने उन्हें राज्य का सबसे प्रभावशाली नेता बना दिया।

हालांकि विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर कई सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सरमा सरकार की राजनीति ध्रुवीकरण और बुलडोजर कार्रवाई पर आधारित रही है। वहीं बीजेपी का दावा है कि उसकी सरकार ने असम में विकास, कानून व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। ब्रह्मपुत्र पर नए पुल, सड़क परियोजनाएं और निवेश योजनाएं बीजेपी की उपलब्धियों के रूप में पेश की जा रही हैं।

अब हिमंत बिस्वा सरमा के सामने दूसरी पारी में कई बड़ी चुनौतियां होंगी। बेरोजगारी, बाढ़, अवैध घुसपैठ, जातीय संतुलन और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार की परीक्षा होगी। लेकिन फिलहाल बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और पीएम मोदी की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि असम में पार्टी का राजनीतिक प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है।

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