भारत और श्रीलंका के बीच 2 टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के सिन्हालेज स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाना है। गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने 6 विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब भारतीय टीम की नजर दूसरे टेस्ट को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने और कोलंबो में एक बार फिर इतिहास रचने पर है।
कोलंबो का यह मैदान भारतीय क्रिकेट के लिए खास यादें रखता है। 2010 में इसी मैदान पर सचिन तेंदुलकर ने श्रीलंका के खिलाफ शानदार दोहरा शतक लगाया था। सचिन ने 347 गेंदों का सामना करते हुए 203 रन की पारी खेली थी। उनकी इस पारी में 23 चौके और 1 छक्का शामिल था। अब 16 साल बाद भारतीय टीम उसी मैदान पर टेस्ट मुकाबला खेलने उतर रही है, इसलिए इस मैच को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में खास उत्साह है।
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट का इतिहास भी भारतीय टीम के पक्ष में रहा है। दोनों टीमों के बीच कई मुकाबलों में भारत ने अपना दबदबा कायम किया है। मौजूदा सीरीज में भी शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम ने पहले टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 6 विकेट से हराया। भारत की बल्लेबाजी में देवदत्त पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेलकर सभी का ध्यान खींचा और टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ा।
पडिक्कल की पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने भारतीय बल्लेबाजी क्रम में नंबर 3 की जगह के लिए अपना मजबूत दावा पेश किया है। गॉल टेस्ट में उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उनके अलावा भारतीय बल्लेबाजी में कप्तान शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों से भी टीम को बड़ी पारियों की उम्मीद होगी।
दूसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य सीरीज को जीत के साथ समाप्त करना होगा। अगर भारत कोलंबो में भी जीत हासिल करता है तो 2-0 से सीरीज अपने नाम करेगा। वहीं श्रीलंका के लिए यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उसे सीरीज बराबर करने के लिए हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। दोनों टीमों के बीच दूसरा टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक खेला जाना निर्धारित है।
भारत के लिए कोलंबो में चुनौती केवल श्रीलंकाई बल्लेबाजों और गेंदबाजों से नहीं होगी, बल्कि वहां की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। श्रीलंका की पिचों पर स्पिन गेंदबाजों को अक्सर मदद मिलती है और मैच आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों के लिए शुरुआत में विकेट बचाना और बाद में परिस्थितियों के मुताबिक रन गति बढ़ाना अहम रहेगा।
श्रीलंका की टीम अपनी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर वापसी करना चाहेगी। पहले टेस्ट में भारतीय बल्लेबाजों ने जिस तरह श्रीलंकाई गेंदबाजी का सामना किया, उसके बाद मेजबान टीम अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है। स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा दूसरे टेस्ट में भी देखने को मिल सकती है।
इस मुकाबले की एक खास कहानी सचिन तेंदुलकर से भी जुड़ी है। 2010 में कोलंबो में उनकी 203 रन की पारी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में आज भी दर्ज है। अब जब भारतीय टीम उसी मैदान पर एक नए दौर के खिलाड़ियों के साथ उतरने जा रही है, तो सवाल यह है कि क्या शुभमन गिल की टीम भी यहां कोई यादगार रिकॉर्ड अपने नाम कर पाएगी।
मौजूदा फॉर्म को देखते हुए भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। गॉल में जीत, देवदत्त पडिक्कल की शानदार बल्लेबाजी और टीम के प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए सकारात्मक संकेत हैं। अब कोलंबो में होने वाला दूसरा टेस्ट यह तय करेगा कि भारत सीरीज को 2-0 से अपने नाम करता है या श्रीलंका वापसी करके मुकाबले को बराबरी पर खत्म करने में सफल रहता है।
