भारत के शीर्ष तकनीकी संस्थानों भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामलों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है, और IIT कानपुर इस सूची में सबसे ऊपर है। 20 जनवरी 2026 को IIT कानपुर के 25 वर्षीय पीएचडी शोध छात्र रामस्वरूप इशराम ने कथित तौर पर मानसिक तनाव के कारण अपने ही कैंपस की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली, जो पिछले तीन हफ्तों में यहां दूसरा ऐसा मामला था। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को इसी संस्थान के एक बीटेक अंतिम वर्ष छात्र जय सिंह मीणा ने भी आत्महत्या की थी। इन घटनाओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है।
पुलिस और संस्थान सूत्रों के अनुसार, पीएचडी छात्र लंबे समय से मानसिक दबाव का सामना कर रहा था और उसने इलाज भी कराया था, लेकिन हालात पर काबू नहीं पा सका। यह लगातार दूसरी घटना होने के कारण पूरे IIT नेटवर्क में चिंताएं बढ़ गई हैं।
इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में उच्च शिक्षा संस्थानों में लगातार बढ़ रहे तनाव, अकेलापन, प्रतियोगिता और मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की कमी जैसे मुद्दे उभर कर सामने आते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच लगभग 65 IIT छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से अकेले IIT कानपुर में 9 मामलों की पुष्टि हुई है — यह किसी भी अन्य IIT कैंपस से अधिक है।
इन कठिनाईयों को देखते हुए केंद्र सरकार ने IIT कानपुर में आत्महत्या के बढ़ते मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन तथा निवारक उपायों से जुड़े सुझाव देगी। इस कदम का उद्देश्य छात्रों के लिए बेहतर मेंटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और समर्थन प्रणाली विकसित करना है, ताकि भावी मामलों को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल शैक्षणिक दबाव ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और मानसिक तनाव भी इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के पीछे कारण हैं। IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि यह युवा मानसिक स्वास्थ्य पर देशव्यापी चर्चा की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं।
