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कोलंबो बैठक पर सियासी घमासान, राम माधव बोले- यह ट्रैक-2 कूटनीति नहीं, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया

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भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित एक क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर ट्रैक-2 कूटनीति की अटकलें सामने आईं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को भारत-पाकिस्तान के बीच बैक चैनल वार्ता या ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के रूप में प्रस्तुत करना गलत और भ्रामक है।

रिपोर्टों के अनुसार, कोलंबो में आयोजित सम्मेलन में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, अमेरिका और अन्य देशों के रणनीतिक विशेषज्ञों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों ने हिस्सा लिया था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस आयोजन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक चर्चाएं हुईं, जिन्हें ट्रैक-2 कूटनीति का हिस्सा बताया गया। हालांकि राम माधव ने स्पष्ट किया कि यह एक वार्षिक सुरक्षा संवाद था, जिसमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञ भाग लेते हैं और इसे किसी द्विपक्षीय वार्ता के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

राम माधव ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सम्मेलन को ट्रैक-2 वार्ता बताना “एक गैर-मुद्दे को मुद्दा बनाने जैसा” है। उन्होंने कहा कि वह केवल एक सत्र में वक्ता के तौर पर शामिल हुए थे और उसके बाद वापस लौट आए थे। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विमर्श का हिस्सा था, न कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई विशेष संवाद प्रक्रिया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैक-2 कूटनीति आमतौर पर सीमित प्रतिभागियों के बीच गोपनीय या अनौपचारिक चर्चा के रूप में होती है, जबकि इस सम्मेलन में अनेक देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक वार्ताएं लंबे समय से ठप पड़ी हुई हैं और दोनों देशों के बीच आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे अब भी प्रमुख बाधाएं बने हुए हैं। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति को लेकर चर्चाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं। हालांकि भारतीय पक्ष लगातार यह दोहराता रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते और किसी भी संवाद के लिए अनुकूल वातावरण का होना आवश्यक है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों की पैनी नजर बनी रहती है। फिलहाल राम माधव के बयान के बाद ट्रैक-2 कूटनीति को लेकर उठे विवाद पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस तरह की बैठकों और संवादों को लेकर चर्चाएं आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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