पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए नए संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर भारत ने सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है और समझौते का देश की राष्ट्रीय सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन किया जा रहा है।
यह समझौता 7 अगस्त को मक्का में हुआ था। इसके तहत तीनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने और किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में साझा सुरक्षा के सिद्धांत पर काम करने की बात कही है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव और तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरण देखने को मिल रहे हैं।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम के संभावित प्रभावों को समझने की प्रक्रिया में है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी घटनाक्रम को गंभीरता से लेता है और जरूरत पड़ने पर अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल भारत ने समझौते पर कोई सीधी आपत्ति जताने के बजाय उसके असर का अध्ययन करने पर जोर दिया है।
इस समझौते का भारत के लिए महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है, जबकि सऊदी अरब के साथ भारत के मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। वहीं तुर्किए और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रक्षा और रणनीतिक सहयोग रहा है। ऐसे में तीनों देशों का एक साथ आना दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बदलते सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल भारत की रणनीति जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने और इसके वास्तविक प्रभावों का आकलन करने की है। आने वाले समय में इस रक्षा समझौते के तहत सहयोग किस स्तर तक बढ़ता है और इसका क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है, इसी आधार पर भारत की आगे की रणनीति और स्पष्ट हो सकती है।
