संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी कूटनीतिक बहस देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण में जम्मू-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान संघर्ष और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और कहा कि आतंकवाद को जारी रखने के गंभीर परिणाम होंगे।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने करीब 23 मिनट के संबोधन के दौरान 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित मध्यस्थ भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में बड़े नुकसान को टाला गया। शरीफ ने इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को फिर उठाया और कहा कि क्षेत्र में भविष्य में संघर्ष रोकने के लिए इसका न्यायसंगत समाधान जरूरी है। भारत पहले भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज करता रहा है।
भारत की ओर से जवाब देते हुए पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के भाषण को तीखी आलोचना के साथ खारिज किया। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद और दोहरे मानदंडों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि बार-बार एक ही दावे दोहराने से वे सच नहीं हो जाते। गहलोत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह भी कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति के परिणाम होंगे।
गहलोत ने अपने जवाब में पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य ढांचे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने पाकिस्तान को सेना के प्रभाव वाला शासन बताते हुए वहां के 27वें संवैधानिक संशोधन का उल्लेख किया। उनके मुताबिक इस संशोधन के तहत पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को आजीवन कानूनी प्रतिरक्षा दी गई है। ये टिप्पणियां भारत की ओर से पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उठाए गए सवालों का हिस्सा थीं।
भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ अपने पुराने रुख को भी दोहराया। गहलोत ने 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। उन्होंने इस तथ्य को पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सामने रखा।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र के मंच से इसे उठाए जाने को वह स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान ने अपने भाषण में कश्मीर को लेकर जनमत संग्रह और समाधान की बात की थी, जबकि भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को उनका देश गंभीरता से लेगा और इसे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा। भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया था और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई को इसके संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए वहां के ईशनिंदा कानूनों और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार का मुद्दा उठाया। भारत का यह जवाब ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कश्मीर, आतंकवाद और 2025 के संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला है।
भारत के जवाब में यह भी दोहराया गया कि आतंकवाद और उसके समर्थकों के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि कश्मीर और आतंकवाद जैसे मुद्दे अभी भी भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक संबंधों में प्रमुख विवाद बने हुए हैं।
