भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए, वहां अपने स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश के माध्यम से इस्लामाबाद सरकार की संवैधानिक प्रक्रिया और सैन्य शासन के बीच बढ़ते प्रभाव पर कड़ा आकलन पेश किया है। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने संविधान में हाल ही में किए गए 27वें संशोधन के जरिए अपने सशस्त्र बलों को असामान्य अधिकार दिए हैं, जिससे पाकिस्तान में एक ‘संवैधानिक तख्तापलट’ जैसा माहौल बन गया है और यह क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन सकता है।
पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र की खुली बहस में कहा कि पाकिस्तान को पहले खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि उसने किस प्रकार अपनी सेना को संवैधानिक तख्तापलट कराने और आसिम मुनीर को आजतक कानूनी मुकदमे से छूट देने जैसा प्रावधान स्वीकार करने की अनुमति दी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि देश में सेना का हावी रहना जारी रहा तो यह न केवल वहां के नागरिकों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगा।
पाकिस्तान के संविधान में 27वें संशोधन के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का नया पद बनाया गया है, जो तीनों — थल सेना, नौसेना और वायु सेना — को एकीकृत कमान में लाता है। इस पद पर नियुक्त किए गए पहले अधिकारी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अब पाँच साल के कार्यकाल के साथ राष्ट्रपति के समान कानूनी सुरक्षा और आजीवन अभियोजन से छूट देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इस प्रकार के विशेष अधिकारों को पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य अधिकारी प्राप्त करता है, जिससे सत्ता का संतुलन कितना प्रभावित हुआ है — इस पर भारत ने चिंता जताई है।
भारत ने तथ्यों के हवाले से यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के संवैधानिक प्रावधान, जो सैन्य नेतृत्व को अनियंत्रित शक्ति और मुकदमों से छूट देते हैं, लोकतांत्रिक शासन और कानून के शासन (rule of law) के मूल सिद्धांतों के विपरीत हैं। भारत की आलोचना यह भी है कि इस तरह के संशोधन सरकार के नियंत्रण और निगरानी को कमजोर करते हैं और सेना के राजनीतिक प्रभुत्व को बढ़ावा देते हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों के लिए चिंता का विषय है।
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में इस प्रकार की संवैधानिक और सैन्य बदलाव की पृष्ठभूमि में घरेलू राजनीति और सुरक्षा चुनौतियां भी सम्मिलित हैं, और यह कदम देश के लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती और क़ानून के शासन को प्रभावित करता दिखाई देता है। भारत का यह बयान दर्शाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की कुछ नीतियों और संवैधानिक बदलावों पर कड़ी नजर रखे हुए है और उसे क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए जोखिमपूर्ण मानता है।
पाकिस्तान नेतृत्व ने अभी तक इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मामला दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद में एक नया जटिल मुद्दा बन कर उभर रहा है, जो भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।
