भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज का तीसरा मुकाबला रविवार, 11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। रांची में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में 249 रन बनाने के बावजूद भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। अब टीम इंडिया की नजर तीसरे मैच में वापसी करने और सीरीज में बढ़त हासिल करने पर है। भारतीय कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने सबसे बड़ी चुनौती वेस्टइंडीज के आक्रामक बल्लेबाजों को रोकने की होगी।
दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य महज 18.3 ओवर में हासिल कर लिया था। कप्तान शाई होप ने 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन की शानदार पारी खेली, जबकि शेरफेन रदरफोर्ड ने 37 गेंदों पर 84 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच 54 गेंदों में 120 रन की साझेदारी हुई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली।
रांची में मिली हार के बाद भारतीय टीम की गेंदबाजी और रणनीति पर सवाल उठे। भारत ने शुरुआत में ही वेस्टइंडीज के दो विकेट हासिल कर लिए थे, लेकिन इसके बाद होप और रदरफोर्ड ने तेजी से रन बनाकर मुकाबले पर पकड़ बना ली। भारतीय गेंदबाज बड़े स्कोर का बचाव नहीं कर सके और विरोधी टीम ने नौ गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। अब इंदौर में टीम को अपनी गेंदबाजी में बेहतर तालमेल और सही समय पर विकेट लेने की रणनीति पर काम करना होगा।
तीसरे मैच के लिए भारतीय टीम में गेंदबाजी संयोजन में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। दूसरे मुकाबले में शिवम दुबे पांचवें गेंदबाज की भूमिका में प्रभाव नहीं छोड़ सके थे। ऐसे में टीम प्रबंधन अतिरिक्त विशेषज्ञ गेंदबाज को मौका देने पर विचार कर सकता है। संभावित विकल्पों में प्रिंस यादव का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, प्लेइंग इलेवन में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला टॉस के समय ही स्पष्ट होगा।
वेस्टइंडीज के पावर हिटर्स के खिलाफ भारतीय गेंदबाज शॉर्ट गेंदों और बाउंसर का इस्तेमाल कर सकते हैं। होप और रदरफोर्ड ने पिछले मैच में तेज गेंदबाजी के साथ स्पिन के खिलाफ भी आक्रामक रुख अपनाया था। ऐसे में गेंदबाजों को सिर्फ गति पर निर्भर रहने के बजाय लाइन, लेंथ और फील्डिंग के हिसाब से गेंदबाजी करनी होगी। खासकर बीच के ओवरों में रन रोकना और साझेदारी तोड़ना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
तेज गेंदबाज मयंक यादव से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। दूसरे टी20 में उन्होंने शुरुआती ओवरों में विकेट लेकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। वहीं, कुलदीप यादव की स्पिन भी वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों की आक्रामकता पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है। भारत को ऐसी योजना बनानी होगी, जिसमें शुरुआती विकेट मिलने के बाद भी विरोधी टीम को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका न मिले।
इंदौर का होलकर स्टेडियम आम तौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है। यहां अच्छी उछाल और अपेक्षाकृत छोटी बाउंड्री के कारण बड़े स्कोर बनने की संभावना रहती है। ऐसे मैदान पर सिर्फ बड़ा स्कोर खड़ा करना पर्याप्त नहीं होता; गेंदबाजों को दबाव के क्षणों में अपनी योजनाओं पर अमल करना भी जरूरी है। दूसरे मैच में 249 रन बनाने के बाद मिली हार ने भारत के सामने यही चुनौती रखी है कि बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी संतुलन कैसे कायम रखा जाए।
गौतम गंभीर ने दूसरे मुकाबले के बाद कहा था कि मजबूत टीमों के खिलाफ बड़े लक्ष्य का बचाव करने का तरीका खोजना होगा। उन्होंने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए हार से सीख लेने पर जोर दिया। अब तीसरे टी20 में भारतीय टीम के पास अपनी रणनीति सुधारने और सीरीज में बढ़त लेने का मौका है। दूसरी ओर, होप और रदरफोर्ड की शानदार फॉर्म वेस्टइंडीज को आत्मविश्वास देगी। ऐसे में इंदौर का मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।
