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इंडिगो के विमानों की ‘अराजकता’ के बाद केंद्र ने दी दो नई एयरलाइंस को मंजूरी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी भारत की विमान सेवा में

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भारत के विमानन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दो नई एयरलाइंस — अल हिंद एयर (Al Hind Air) और फ्लाईएक्सप्रेस (FlyExpress) — को परिचालन की तैयारी शुरू करने के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय हवाई यात्रा की व्यवस्था पर इंडिगो विमान सेवा के हालिया ‘अराजकता’ (flight chaos) के कारण सवाल उठे हैं और प्रतिस्पर्धा की कमी से भारतीय उड्डयन बाजार कमजोर दिखाई दिया है।

दिसंबर 2025 के शुरुआती हफ्तों में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को नई Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कई हज़ार उड़ानों को रद्द करना पड़ा और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इस संकट ने देश के विमानन तंत्र की एक-तरफा निर्भरता को उजागर किया, क्योंकि इंडिगो अकेले घरेलू बाजार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करती है, जबकि एयर इंडिया समूह के साथ मिलकर यह आंकड़ा 90 प्रतिशत के करीब पहुंच जाता है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि मंत्रालय ने पिछले सप्ताह में कई नई एयरलाइंस की टीमों से मुलाक़ात की, जिनमें शंख एयर (Shankh Air), अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस शामिल हैं। शंख एयर को पहले ही NOC मिल चुका है और यह 2026 में अपनी वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करने की योजना बना रही है, जबकि अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को इस सप्ताह NOC दिया गया है।

सरकार का यह निर्णय घरेलू विमानन बाजार में अधिक विकल्प और बेहतर प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई एयरलाइनों के आने से न केवल यात्रियों के लिए बेहतर सेवा और विकल्प मिलेंगे, बल्कि इंडिगो जैसे बड़े वाहकों पर एकाधिकार (monopoly) का दबाव भी कम होगा। इससे टिकट दरों में संतुलन, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और उड़ान सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।

हालाँकि, NOC मिलने के बाद भी इन एयरलाइनों को एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) प्राप्त करना होगा, जो कि वाणिज्यिक उड़ान चलाने के लिए अगला आवश्यक चरण है। यह प्रक्रिया तकनीकी जांच, सुरक्षा मानकों, विमान सूची और संचालन योजना की समीक्षा के बाद पूरी होती है।

उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है, लेकिन उच्च परिचालन लागत, ईंधन मूल्य उछाल, पायलटों और चालक दल की भरती-प्रशिक्षण चुनौतियाँ देश की एयरलाइंस के लिए बड़ी बाधा बनती हैं। ऐसे में नई एयरलाइनों को सफलता मिलने के लिए मजबूत प्रबंधन, वित्तीय स्थिरता और व्यावसायिक योजना की आवश्यकता होगी।

इससे पहले इंडिगो की उड़ानों में व्यापक व्यवधान के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA (निदेशालय सामान्य नागरिक उड्डयन) ने एयरलाइन को परिचालन समीक्षा, चालक दल के नियोजन और उड़ान संशय के पुनःस्थापन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि इस संकट की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए उड्डयन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और विविधता को बढ़ावा देना आवश्यक है।

अब देखना यह है कि अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस कब अपनी एयरक्राफ्ट को skies में उतारते हैं और भारतीय यात्रियों को भरोसेमंद विकल्प प्रदान करते हैं। इसके साथ ही इंडिगो और एयर इंडिया जैसे स्थापित वाहकों के सामने प्रतिस्पर्धात्मक दबाव में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे पूरे विमानन क्षेत्र का मानदंड बदल सकता है।

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