भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर अब विवाद अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है। हाल ही में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाते हुए भारत से इस संधि को फिर से लागू कराने की मांग की है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत द्वारा संधि को निलंबित किए जाने से उसके लिए गंभीर जल संकट की स्थिति पैदा हो रही है और इसका असर सीधे उसकी कृषि, पीने के पानी और ऊर्जा उत्पादन पर पड़ सकता है।
दरअसल, भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस ऐतिहासिक संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता है, जिसके चलते इस समझौते को जारी रखना संभव नहीं है। भारत ने साफ किया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।
पाकिस्तान ने इस फैसले को “अवैध” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की ओर से UNSC को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भारत का यह कदम क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और मानवीय स्थिति के लिए गंभीर खतरा है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि पानी को “हथियार” के रूप में इस्तेमाल करना दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए बेहद अहम है, क्योंकि उसकी करीब 80 प्रतिशत कृषि इसी नदी तंत्र पर निर्भर है। ऐसे में यदि भारत इस संधि को लंबे समय तक निलंबित रखता है, तो पाकिस्तान को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं भारत का रुख पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। भारतीय पक्ष का कहना है कि यह केवल जल समझौता नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। भारत पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते”, और जब तक आतंकवाद पर रोक नहीं लगती, तब तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब केवल द्विपक्षीय नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। पाकिस्तान जहां वैश्विक मंचों पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताकर किसी भी बाहरी दबाव को खारिज कर रहा है।
कुल मिलाकर, सिंधु जल संधि को लेकर पैदा हुआ यह नया विवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या UNSC इस मामले में कोई भूमिका निभाता है या दोनों देश इसे आपसी बातचीत से सुलझाने की कोशिश करते हैं।
