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ईरान का बड़ा पलटवार: ‘या अली इब्न मूसा अल रज़ा’ ऑपरेशन के तहत अमेरिका-इजरायल पर मिसाइलों की बरसात

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मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान तेज कर दिया है। इस बार ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने “या अली इब्न मूसा अल रज़ा” कोडनेम के तहत एक नया हमला शुरू किया, जिसे मौजूदा युद्ध का सबसे आक्रामक चरण माना जा रहा है। यह हमला ईरान के व्यापक सैन्य अभियान “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” का हिस्सा है, जिसके तहत लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC ने इस अभियान के तहत इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई चरणों में हमले किए। इन हमलों में उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबर है। इससे पहले भी ईरान ने दावा किया था कि वह 50 से अधिक ठिकानों को निशाना बना चुका है और यह अभियान “धीरे-धीरे दुश्मन को कमजोर करने” की रणनीति पर आधारित है।

विशेष बात यह है कि इस ऑपरेशन को धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व देने के लिए “या अली इब्न मूसा अल रज़ा” का नाम दिया गया है, जो शिया समुदाय में अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व हैं। ईरान इस तरह के कोडनेम के जरिए अपने सैन्य अभियान को वैचारिक और धार्मिक समर्थन देने की कोशिश करता रहा है।

दरअसल, यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के कई अहम सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। तब से लेकर अब तक यह संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई है।

हालिया घटनाओं में इजरायल ने ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भी निशाना बनाया है, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। वहीं अमेरिका भी इस युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल है और उसने ईरान के सैन्य ठिकानों पर कई बड़े हमले किए हैं।

इस पूरे संघर्ष का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति, व्यापार और सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसमें कई देश शामिल हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, “या अली इब्न मूसा अल रज़ा” ऑपरेशन ईरान की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाना चाहता है। आने वाले दिनों में इस युद्ध की दिशा क्या होगी, यह काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सैन्य कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

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