ईरान और इज़राइल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei सीधे तौर पर शासन नहीं चला पा रहे हैं और वे केवल चिट्ठियों के जरिए ही सरकारी तंत्र से संपर्क बनाए हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है और संदेशों के आदान-प्रदान के लिए पारंपरिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि संदेश हाथ से लिखे जाते हैं, उन्हें सील कर भरोसेमंद कूरियरों की एक गुप्त श्रृंखला के जरिए पहुंचाया जाता है। ये कूरियर अलग-अलग रास्तों से यात्रा करते हुए संदेश को उनके ठिकाने तक पहुंचाते हैं, ताकि किसी भी तरह की निगरानी से बचा जा सके। यह पूरा सिस्टम इस बात को दर्शाता है कि ईरान की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था इस समय अत्यधिक गोपनीय और असामान्य परिस्थितियों में काम कर रही है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि Mojtaba Khamenei सार्वजनिक रूप से अब तक नजर नहीं आए हैं। इसके पीछे उनकी खराब शारीरिक स्थिति को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि हालिया हमलों में उन्हें गंभीर चोटें आई हैं—उनके पैर का ऑपरेशन हो चुका है, हाथ की सर्जरी हुई है और चेहरे पर गंभीर जलन के कारण उन्हें बोलने में भी दिक्कत हो रही है।
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा। इसी दौरान पूर्व सुप्रीम लीडर की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया। लेकिन उनकी चोटों और लगातार खतरे के कारण वे खुले तौर पर सामने नहीं आ पा रहे हैं, जिससे शासन संचालन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान का असली नियंत्रण काफी हद तक सैन्य नेतृत्व, खासकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हाथों में चला गया है, जबकि औपचारिक रूप से सर्वोच्च नेता की भूमिका सीमित होती जा रही है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिला है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी और संचार बाधाएं भी सामने आ रही हैं।
इस बीच, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से लगातार दबाव बनाए जाने के बावजूद ईरान ने आंतरिक एकजुटता का दावा किया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान की मौजूदा नेतृत्व संरचना युद्ध जैसे गंभीर हालात में प्रभावी तरीके से काम कर पा रही है या नहीं।
कुल मिलाकर, ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच सामने आई यह रिपोर्ट न केवल वहां की सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि देश का सर्वोच्च नेतृत्व अभूतपूर्व परिस्थितियों में काम करने को मजबूर है। आने वाले समय में यह स्थिति युद्ध और कूटनीतिक समीकरणों पर कितना असर डालती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
