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ईरान-यूएस-इज़राइल युद्ध: इरानी मिसाइलों की शक्ति, रेंज और हथियारों की सूची — जानिए किस मिसाइल से कितना खतरा

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मध्य पूर्व में जारी ईरान-संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच संघर्ष ने पूरी दुनिया के लिए सैन्य तकनीक और मिसाइल क्षमताओं को एक बार फिर से केंद्र में ला दिया है। इस दौरान खास तौर पर ईरान के मिसाइल शस्त्रागार (arsenal) पर कड़ी नजर रखी जा रही है क्योंकि तेहरान की मिसाइलें ही उसके जवाबी हमले की प्रमुख क्षमता हैं और इनकी रेंज पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।

ईरान के पास छोटे से लेकर मध्यम रेंज और कुछ उन्नत मिसाइलें हैं, जो अलग-अलग दूरी तक लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं। सबसे पहले शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें जैसे Shahab-1 और Shahab-2 हैं, जिनकी रेंज लगभग 300 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक है। इसके अलावा Qiam-1 और Fateh-110/Fateh-313 जैसे मॉडल भी शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता तकरीबन 300 से 800 किलोमीटर तक मानी जाती है, जो नजदीकी सैन्य ठिकानों और आसपास के उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हैं।

मध्यम और लंबी रेंज वाले मिसाइलों की सूची इस बल का दिल हैं। इनमें Shahab-3, Emad, Ghadr-1, Khorramshahr और Sejjil (Sejil/Sejil-2) जैसे बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी रेंज लगभग 1,300 किलोमीटर से 2,000 किलोमीटर तक होती है। ये मिसाइलें सीधे इज़राइल, खाड़ी देशों और अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों तक पहुंच सकती हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और खतरों का दायरा भी बढ़ जाता है।

एक और उल्लेखनीय मिसाइल Kheibar Shekan है, जो एक मध्यम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है और अनुमानित रेंज लगभग 1,450 किलोमीटर बताई जाती है। यह मिसाइल ठोस ईंधन का उपयोग करती है और निर्देशित युद्धवाहक प्रणाली के साथ है, जिससे उसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो सकता है।

ईरान के मिसाइल शस्त्रागार में क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन प्रणाली भी शामिल हैं। क्रूज़ मिसाइलें जैसे Soumar, Ya-Ali, Hoveyzeh, Paveh और Ra’ad भंजर रडार और एयर डिफेंस को चकमा देकर लक्ष्य तक पहुँचने की क्षमता रखती हैं और कुछ क्रूज़ मिसाइलों की रेंज लगभग 2,500 किलोमीटर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा, शादेड सीरीज जैसे Shahed-136 और अन्य टाइप के यूएवी/ड्रोन भी ईरान के हथियार डिपो का हिस्सा हैं, जिनका उपयोग पिछले कुछ संघर्षों में विविध गोलों के लिए किया गया है।

यह मिसाइल क्षमता इतना व्यापक है कि इज़राइली सेना ने एक नकाशा जारी किया है जिसमें बताया गया कि ईरान की प्रमुख मिसाइलें भारत तक संभावित मारक दूरी में भी हो सकती हैं, अगर स्थिति और भी बढ़ती है। इस चेतावनी ने वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों के बीच चिंता और भी बढ़ा दी है, क्योंकि मिसाइल रेंज 2,000 किलोमीटर से ऊपर निकल सकती है और इससे रणनीतिक दूरी और जोखिम को मापा जा रहा है।

हालांकि ईरान की मिसाइल क्षमता का स्पष्ट डेटा अक्सर विवादित रहता है और कई मिसाइलों की वास्तविक क्षमता तथा प्रभावनिष्ठा पर विशेषज्ञ मत विभाजित रहते हैं, फिर भी यह स्पष्ट है कि तेहरान के मिसाइल शस्त्रागार में बहुसंख्यक प्रकार की बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें शामिल हैं, जिनका उपयोग रामबाण, व्यापक क्षेत्रीय हमला और हमला-जवाबी रणनीति के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा ईरान के पास कई एंटी-एयरक्राफ्ट (surface-to-air) मिसाइल सिस्टम और ड्रोन्स भी हैं, जो उसकी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाते हैं।

अभी जारी संघर्ष के बीच, मिसाइलों की भूमिका केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है बल्कि यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, वैश्विक राजनीति और रणनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर रही है, जिससे पूरे मध्य पूर्व सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा-नीति में बदलाव की संभावनाएं उभर रही हैं।

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