मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव अब और खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के संकेत देते हुए खाड़ी क्षेत्र के आठ अहम पुलों की एक ‘हिट लिस्ट’ जारी कर दी है। इस कदम को सीधे तौर पर “टिट-फॉर-टैट” रणनीति माना जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
दरअसल, हाल ही में अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के कराज शहर के पास स्थित B1 ब्रिज पर एयरस्ट्राइक की गई थी, जिसे मध्य पूर्व के सबसे ऊंचे पुलों में गिना जाता है। इस हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत और करीब 95 लोग घायल हुए, जिससे ईरान में भारी गुस्सा देखने को मिला।
इसी के जवाब में ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी ने खाड़ी देशों और जॉर्डन में मौजूद आठ रणनीतिक पुलों की सूची सार्वजनिक की है, जिन्हें संभावित लक्ष्य बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन पुलों में कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और अन्य देशों के बेहद महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक शामिल हैं, जो न सिर्फ स्थानीय यातायात बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिए भी बेहद अहम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन पुलों पर हमला होता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र पहले ही ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र है, और यहां के बुनियादी ढांचे पर हमला होने से तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। पहले से जारी संघर्ष के चलते Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ चुका है, जिससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता देखी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को और खतरनाक बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर और हमले करने की चेतावनी दे चुके हैं, वहीं ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति को लेकर चिंतित है, क्योंकि यह संघर्ष अब कई देशों को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह संकट एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक शांति पर पड़ना तय माना जा रहा है।
