मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए जवाबी हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगातार तीन रातों तक अभियान चलाते हुए ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, नौसैनिक सुविधाएं, संचार केंद्र और सैन्य कमांड ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ईरान समर्थित बलों की ओर से अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद अमेरिका ने व्यापक हवाई और मिसाइल हमलों की योजना लागू की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अभियान को अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, ड्रोन और लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों के जरिए अंजाम दिया गया। कई स्थानों पर भारी विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जबकि ईरानी रक्षा प्रतिष्ठानों को गंभीर नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है।
ईरान ने भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने का दावा किया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनसे जुड़े रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए गए। इसके चलते कतर, बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया। कई स्थानों पर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की गई।
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और महंगाई पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो यह संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के रुख को देखते हुए तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं।
