पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं पर बड़ा बयान दिया है। संसद परिसर में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार ने साफ तौर पर कहा कि भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने की, जिसमें गृह मंत्री Amit Shah, विदेश मंत्री S. Jaishankar समेत कई वरिष्ठ मंत्री और विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए।
सरकार ने बैठक में बताया कि भले ही मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है और कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने में देरी का सामना कर रहे हैं, लेकिन भारत ने स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम कर रखे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देश के पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ जगहों पर जो लंबी कतारें और घबराहट देखने को मिल रही है, वह केवल अफवाहों का नतीजा है। तेल कंपनियों और राज्य सरकारों ने भी लोगों से अपील की है कि वे जरूरत से ज्यादा ईंधन न भरवाएं, क्योंकि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है।
हालांकि, सरकार ने यह जरूर माना कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है और भविष्य में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पहले ही सात सशक्त समूह (Empowered Groups) गठित किए हैं, जो ईंधन, गैस, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे मुद्दों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं और रणनीति तैयार कर रहे हैं।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है। लेकिन सरकार ने भरोसा दिलाया कि वैकल्पिक सप्लाई रूट और अन्य देशों से आयात के जरिए स्थिति को संभाला जा रहा है।
कुल मिलाकर, सरकार ने सर्वदलीय बैठक के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। साथ ही, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी सरकार लगातार सक्रिय रूप से काम कर रही है।
