भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान किशन ने आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए अपनी कमबैक कहानी को यादगार प्रदर्शन में बदल दिया है। किशन की यह पारी सिर्फ एक रन नहीं थी, बल्कि बड़े मैचों के दबाव और कठिन चुनौतियों के बीच उनके आत्म-विश्वास और क्षमता की मिसाल भी थी। उन्होंने पाकिस्तान के गेंदबाज़ों पर धावा बोलते हुए 40 गेंदों में 77 रन बनाए, जिसमें 27 गेंदों में अर्धशतक शामिल था — यह पारी रिकॉर्ड्स की कई श्रेणियों में दर्ज हो गई है।
मैच के दौरान किशन ने न सिर्फ ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी की, बल्कि भारत-पाकिस्तान टी20 इतिहास में सबसे तेज़ अर्धशतकों में से एक जमाया। उनके 27-बॉल की पारी ने पूर्व दिग्गजों जैसे युवराज सिंह (जिनकी 29-बॉल की पारी थी) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा और किशन को तीसरे सबसे तेज़ 50 बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में शामिल कर दिया।
इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 175/7 का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया, जिसमें किशन की 77 रन की पारी मुख्य स्तम्भ रही। उन्होंने पाकिस्तान के प्रीमियम पेसरों से लेकर स्पिनरों तक को मिलाकर हर प्रकार की गेंदबाज़ी का सामना किया और गेंदियों की रणनीति को ध्वस्त किया। उनकी पारी में सात चौके और दो छक्के शामिल थे, और उन्होंने अपनी आक्रामक अंदाज़ से पिच पर भारतीय टीम को मजबूती दी।
विशेष रूप से, किशन ने पावरप्ले में 42 रन बनाए, जो भारत-पाकिस्तान टी20 मुकाबलों में पावरप्ले में अब तक का सर्वाधिक स्कोर भी है — इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने खेल के शुरुआत से ही आक्रमण की मुद्रा अपनाई।
यह पारी ईशान की कमबैक स्टोरी को और अधिक प्रभावशाली बनाती है, क्योंकि वे इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में लौटे हैं। वे पहले बीसीसीआई ने टीम में चयन के बाद कुछ मैचों में चोट और संघर्ष का सामना कर चुके थे, लेकिन देर तक मैदान पर वापसी कर उन्होंने अपने प्रदर्शन को उच्च स्तर पर पहुंचाया है। इसके पहले भी उन्होंने न्यूजीलैंड और अन्य टीमों के खिलाफ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय T20 मैचों में खेल में अपना दबदबा दिखाया था, जिससे यह साबित हुआ कि जब मौका मिलता है, तो वह उसे बड़े स्तर पर भुनाने की क्षमता रखते हैं।
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि ईशान किशन की यह पारी टीम इंडिया के सुपर 8 की ओर बढ़ते अभियान में निर्णायक साबित हो सकती है। पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे सामरिक और आक्रमक सुझावों ने भारतीय पारी को स्थिरता प्रदान की और विरोधियों को शुरुआती दबाव में रखा। किशन की यह पारी टीम के स्कोर का मुख्य आधार बनी और अंततः भारत को 61 रन से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
