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दुबई समेत कई देशों में भारतीय मजदूरों पर संकट

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इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध का असर अब खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासी मजदूरों पर साफ दिखाई देने लगा है। दुबई, अबू धाबी, कतर, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों में काम कर रहे भारतीयों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ जान का खतरा और दूसरी तरफ नौकरी की अस्थिरता। हाल के दिनों में ईरान द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण इन देशों का माहौल तनावपूर्ण हो गया है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सीधा असर पड़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या ब्लू-कॉलर नौकरियों में लगी हुई है जैसे निर्माण, तेल-गैस, परिवहन और सेवा क्षेत्र। यह लोग भारत में अपने परिवारों का मुख्य सहारा हैं। हालांकि युद्ध के कारण कई कंपनियों ने कामकाज धीमा कर दिया है या कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी पर भेज दिया है, जिससे मजदूरों की आय पर असर पड़ रहा है।

दुबई जैसे शहर, जिन्हें पहले सुरक्षित और स्थिर माना जाता था, अब सीधे हमलों के दायरे में आ गए हैं। हाल ही में एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले ने यह साफ कर दिया कि संघर्ष अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुका है।

इस स्थिति के चलते कई भारतीय मजदूर असमंजस में हैं—वे न तो अपनी नौकरी छोड़कर भारत लौटना चाहते हैं और न ही असुरक्षित माहौल में रहना आसान लग रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो निर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नौकरी में कटौती हो सकती है।

दूसरी ओर, कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम या सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन इससे समस्या पूरी तरह हल नहीं हो रही। मजदूरों के सामने रोज़गार की अनिश्चितता के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों का भी दबाव है।

भारत सरकार भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों से देश में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आती है। ऐसे में यदि युद्ध और गहराता है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, इजरायल-ईरान युद्ध अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रहा, बल्कि इसका असर आम लोगों, खासकर प्रवासी मजदूरों के जीवन पर गहराई से पड़ रहा है। आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे भारतीयों के लिए विदेश में काम करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

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