
मिडिल ईस्ट में इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार खतरनाक रूप लेता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष में अब पूरे पश्चिम एशिया के कई देश सीधे तौर पर प्रभावित होने लगे हैं। ताज़ा घटनाक्रम में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और दर्जनों ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, हालांकि कुछ हमलों के कारण धमाके और आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं।
दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों में भी तनाव का माहौल देखने को मिला। दुबई एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी और आसमान में धुएं के गुबार दिखाई दिए, जिससे कुछ समय के लिए उड़ानों में देरी और यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एयरपोर्ट के आसपास धुआँ उठता दिखाई दिया, हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम ने संदिग्ध ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया था।
इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में तेहरान और अन्य शहरों में भारी विस्फोट हुए और कई सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। लगातार जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है और कई शहरों में सायरन बजने लगे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष के बीच ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अपने हमले बंद नहीं किए तो अमेरिका और उसके सहयोगी और बड़े सैन्य अभियान शुरू कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता ईरान का “बिना शर्त आत्मसमर्पण” है। दूसरी ओर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिए हैं कि इज़राइल ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह कमजोर करने तक कार्रवाई जारी रखेगा।
इस बीच युद्ध का असर खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ने लगा है। दुबई, कतर और सऊदी अरब के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई देशों ने अपने एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि अगर यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो यह पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिसका असर दुनिया की तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों से यह साफ हो गया है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।



