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लेबनान में तबाही का ‘गाज़ा मॉडल’: इजरायल के हमलों में पूरे गांव मलबे में तब्दील, बढ़ा मानवीय संकट

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने अब और भयावह रूप ले लिया है। Israel द्वारा Lebanon में किए जा रहे हमलों को अब “गाज़ा मॉडल” की तर्ज पर बताया जा रहा है, जहां पूरे-के-पूरे गांवों को व्यवस्थित तरीके से नष्ट किया जा रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स और वीडियो में दिखाया गया है कि कई सीमावर्ती गांवों में घरों को या तो हवाई हमलों से उड़ाया गया या फिर विस्फोटक लगाकर दूर से ही ध्वस्त कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके खंडहर में बदल गए हैं।

इस सैन्य अभियान के पीछे Israel का दावा है कि वह Hezbollah के ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने के लिए कार्रवाई कर रहा है। हालांकि जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के कई गांवों—जैसे तैयबेह और नकूरा—में लगभग हर घर को निशाना बनाया गया है, जिससे वहां के निवासियों के पास लौटने के लिए कुछ भी नहीं बचा।

इस हमले का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। कई परिवारों ने न सिर्फ अपनी संपत्ति बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी यादें भी खो दी हैं। मानवीय संगठनों ने इन हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि बिना स्पष्ट सैन्य जरूरत के नागरिक घरों को नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

इजरायली सेना ने इस अभियान के तहत बड़े पैमाने पर हवाई हमले भी किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ ही मिनटों में 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

इस बीच, लेबनान में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक हमले में एक छोटे बच्चे की मौत हो गई, जो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल था। इस तरह की घटनाएं इस संघर्ष की भयावहता को और उजागर करती हैं, जहां आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे “डोमिसाइड” यानी जानबूझकर घरों को नष्ट करने की रणनीति बताया है, जिसका उद्देश्य लोगों को उनके क्षेत्रों से स्थायी रूप से हटाना हो सकता है।

इसके अलावा, Israel इस क्षेत्र में एक “सुरक्षा क्षेत्र” बनाने की योजना भी बना रहा है, जिससे लेबनान के नागरिकों की वापसी और मुश्किल हो सकती है। वहीं Hezbollah और Israel के बीच लगातार हो रही जवाबी कार्रवाई से यह संघर्ष और लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, लेबनान में चल रहा यह सैन्य अभियान अब केवल एक सीमित युद्ध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े मानवीय संकट में बदलता जा रहा है। अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है और लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है

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