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कौशांबी ब्लास्ट के बाद बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी नौशाद एनकाउंटर में गिरफ्तार; बेटे आदिल पर NSA, 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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उत्तर प्रदेश के कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। 31 अगस्त को हुए इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद फरार चल रहे मुख्य आरोपी और फैक्ट्री मालिक नौशाद को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, घेराबंदी के दौरान नौशाद ने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस के मुताबिक, नौशाद घटना के बाद फरार हो गया था। उसकी तलाश में कई पुलिस टीमें लगाई गई थीं। मंगलवार तड़के पुलिस को उसके ठिकाने की सूचना मिली, जिसके बाद चरवा थाना पुलिस और एसओजी की टीम ने उसे घेर लिया। पुलिस का दावा है कि खुद को घिरा देखकर नौशाद ने पुलिस टीम पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी में तमंचा और कारतूस मिलने की भी बात सामने आई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि नौशाद की पटाखा फैक्ट्री पहले से विवादों में थी। पुलिस के अनुसार, अक्टूबर 2024 में उसके गोदाम से करीब 1,200 किलोग्राम बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद उसका लाइसेंस निलंबित किया गया था, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अवैध तरीके से पटाखों और विस्फोटक सामग्री का कारोबार जारी रखा गया।

हादसे के बाद नौशाद के बेटे आदिल समेत परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। आदिल अभी फरार है। प्रशासन ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है। प्रशासन ने उसके ठिकानों पर भी कार्रवाई की है।

प्रशासन ने अवैध निर्माण और गोदामों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। जांच के दौरान कई जगहों से पटाखे और बारूद बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे ऐसे ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने कथित लापरवाही के आरोप में एक इंस्पेक्टर और 6 दरोगाओं समेत कुल 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। जांच इस बात की भी हो रही है कि पहले से कार्रवाई के बावजूद अवैध पटाखा फैक्ट्री कैसे चलती रही और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

धमाका इतना भीषण था कि आसपास के मकान भी प्रभावित हुए और मलबे में लोगों के दबे होने की सूचना के बाद लंबे समय तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। राहत और बचाव टीमों ने मलबा हटाकर शवों और घायलों को बाहर निकाला। इस हादसे ने अवैध विस्फोटक कारोबार और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार नौशाद से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री कितने समय से रखी जा रही थी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और इतनी बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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