Site icon Prsd News

मुंबई में मुस्लिम आबादी दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है? किरीट सोमैया का विवादित दावा और जनसंख्या पर बहस

download 7 13

मुंबई में आबादी के बढ़ते रुझानों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता किरित सोमैया ने दावा किया है कि मुंबई में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर हिंदू आबादी की तुलना में लगभग दोगुनी है, और इसके पीछे केवल प्राकृतिक प्रजनन दर नहीं, बल्कि बांग्लादेशी प्रवासन जैसे तत्वों का भी योगदान बताया जा रहा है। सोमैया ने यह बयान 28 दिसंबर, 2025 को जारी किया गया एक सोशल मीडिया पोस्ट में दिया, जिसमें उन्होंने NFHS (National Family Health Survey) जैसी रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर अधिक होने का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि मुंबई में मुस्लिम दंपत्ति औसतन अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं, जबकि हिंदू परिवारों की प्रजनन दर कम बताई जा रही है।

उनके अनुसार, मुंबई जैसी वैश्विक महानगरीय शहर में हिंदू परिवारों की औसत प्रजनन दर लगभग 1.3 से कम है, जबकि मुस्लिम परिवारों की प्रजनन दर लगभग 3 के करीब बताई जा रही है, जिससे मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर दोगुनी हो जाती है। सोमैया ने यह भी दावा किया कि यह बढ़ती आबादी केवल प्राकृतिक प्रजनन वृद्धि के कारण नहीं है, बल्कि बांग्लादेशी प्रवासियों का शामिल होना इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहा है। इस तरह के बयान अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बनते हैं, क्योंकि वे सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशील विषयों को छूते हैं।

सामाजिक वैज्ञानिक और जनसंख्या विशेषज्ञ, हालांकि, इसके विपरीत बताते हैं कि किसी भी समुदाय की आबादी के बढ़ने या कम होने की दर पर केवल प्रजनन दर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, शहरीकरण और महिला सशक्तिकरण जैसे कई सामाजिक-आर्थिक कारक प्रभाव डालते हैं। वे यह भी कहते हैं कि ऐसी दावों को करने से पहले आधिकारिक जनगणना आंकड़ों और सटीक, सत्यापित शोध के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना चाहिए।

मुंबई की वास्तविक जनसांख्यिकीय संरचना के बारे में उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़े बताते हैं कि शहर में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी अभी भी अधिकांश है, और मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग एक-पाँचवाँ (लगभग 20%) के आसपास है। ये आंकड़े पिछले censuses और डेमोग्राफिक स्टडीज पर आधारित हैं, जो शहर के विविध धार्मिक समूहों की संख्या को दर्शाते हैं।

हालांकि समाज और राजनीति में जनसंख्या वृद्धि को लेकर चर्चा पुरानी है, और समय-समय पर विभिन्न नेताओं द्वारा इस तरह के दावों और चिंताओं को सार्वजनिक किया जाता रहा है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि जनसंख्या का परिवर्तन बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और इसे केवल धार्मिक आधार पर तय सूत्रों से समझना सतही होगा। सर्वेक्षणों और रिपोर्टों में वैधानिक, वैज्ञानिक तरीके से डेटा एकत्र करके ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए, ताकि असत्य सूचनाएँ या भ्रामक संदेश समाज में तनाव न फैलाएँ

इस बयान के बाद मुंबई और महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों और जनमानस के बीच जनसंख्या वृद्धि, सांप्रदायिक संतुलन और सामाजिक संरचना जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। विश्लेषकों के अनुसार, चुनावों के समय इस तरह के बयान राजनीतिक रणनीति और वोट बैंक की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि आबादी के रुझान पर आधारित दावे अक्सर मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करते हैं।

Exit mobile version