Advertisement
उत्तर प्रदेशकानपुरलाइव अपडेट
Trending

कानपुर में डीएम के कार्यक्रम में युवक ने पेट्रोल डालकर लगाई आग

Advertisement
Advertisement

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक चौकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक युवक ने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के सार्वजनिक कार्यक्रम में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। यह घटना प्रशासनिक समारोह के दौरान घटी, जिससे कार्यक्रम स्थल पर हड़कंप मच गया और सुरक्षा कर्मियों सहित पुलिस तत्काल सक्रिय हो गई। फिलहाल मामले की गहनता से जांच चल रही है और आरोपी युवक को हिरासत में लिया गया है। ताजा जानकारी के अनुसार, युवक के इस कदम के पीछे उसकी व्यक्तिगत शिकायत और तनाव का कारण बताया जा रहा है।

घटना उस वक्त हुई जब जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल लोग बैठे थे और आयोजन सामान्य रूप से चल रहा था। इसी दौरान एक युवक ने पेट्रोल की बोतल निकाली और कार्यक्रम स्थल पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे वहां मौजूद लोग चौंक उठे और भगदड़ मच गई। आग को बढ़ने से पहले कर्मचारियों और पुलिस ने मिलकर काबू पाया और आरोपी को पकड़ लिया। प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने यह कदम कुछ घरेलू तकरार और पड़ोसियों से हुई परेशानियों के चलते उठाया

पीड़ित युवक का कहना है कि उसे अपने पड़ोसियों द्वारा धमकाया जाता रहा है, और आरोप है कि वे कहते हैं, “हमारा बेटा फौज में है, तुम कहीं भी शिकायत कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।” युवकों के परिवार में तनाव की स्थितियाँ पहले से मौजूद रही हैं, और इसी दबाव में युवक ने ऐसा कदम उठाया, बयान देते हुए बताया गया। घटना के बाद डीएम और वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने की अपील की है।

स्थानीय पुलिस ने आरोपी युवक को हत्या के प्रयास तथा सार्वजनिक भ्रम फैलाने से सम्बंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर हिरासत में लिया है। पूछताछ जारी है और पुलिस सीसीटीवी फुटेज, संबंधित गवाहों के बयान तथा युवक के मानसिक और सामाजिक इतिहास की जांच कर रही है, ताकि स्पष्ट कारणों का पता चल सके। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि इस प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने न केवल कानपुर में बल्कि पूरे प्रदेश में सरकारी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी सार्वजनिक आयोजन में सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब व्यक्ति किसी निजी तनाव या असंतोष के चलते ऐसे उकसावे भरे कदम तक पहुंच जाए

पुलिस और प्रशासन दोनों ही यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी घटना से पहले चेतावनी के संकेतों को पहचाना जा सके और समय रहते रोकथाम की जा सके ताकि भविष्य में इस तरह की असामाजिक हरकतों से सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में न पड़े

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share