उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। यहां मोबाइल की किस्त यानी EMI का भुगतान नहीं कर पाने पर एक व्यक्ति को कथित तौर पर ब्लड बैंक ले जाने और उसका खून निकलवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद मामला चर्चा में है और इसे लेकर कई गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ने किस्तों पर मोबाइल फोन खरीदा था, लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण वह समय पर EMI नहीं चुका सका। इसके बाद कथित तौर पर उससे वसूली के लिए दबाव बनाया गया। मामला उस वक्त और गंभीर हो गया, जब उसे ब्लड बैंक तक ले जाने की बात सामने आई। आरोप है कि वहां उससे खून निकलवाने की कोशिश की गई और इसे मोबाइल की बकाया किस्त से जोड़कर देखा गया।
यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि खून दान एक स्वैच्छिक चिकित्सकीय प्रक्रिया है। किसी व्यक्ति से कर्ज या EMI की वसूली के लिए रक्त लेने का कोई सामान्य कानूनी या चिकित्सकीय आधार नहीं है। भारत में ब्लड बैंक रक्त संग्रह, जांच और वितरण के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत काम करते हैं। सरकारी e-RaktKosh भी देशभर के ब्लड बैंकों में उपलब्ध रक्त की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था है।
सामान्य तौर पर रक्तदान के लिए व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और निर्धारित पात्रता मानकों की जांच की जाती है। रक्तदान का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना होता है, न कि किसी वित्तीय लेनदेन या कर्ज की वसूली करना। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी भी स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देती है और सुरक्षित रक्त सेवाओं के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं पर जोर देती है।
इस मामले ने डिजिटल लोन, EMI और रिकवरी एजेंटों के तौर-तरीकों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आजकल मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी चीजें आसान EMI पर खरीदी जा सकती हैं। लेकिन किस्त में देरी होने पर ग्राहक पर दबाव बनाने और वसूली के नाम पर किसी तरह की जबरदस्ती करने के आरोप बेहद गंभीर माने जाएंगे।
हालांकि, घटना से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक विस्तृत पक्ष सामने आना जरूरी है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि व्यक्ति के साथ कथित तौर पर ऐसा व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ब्लड बैंक में वास्तव में क्या हुआ और इसके पीछे किसकी भूमिका थी।
लखनऊ में ब्लड बैंक और अस्पतालों की नियमित चिकित्सा सेवाएं अलग विषय हैं। उदाहरण के तौर पर शहर में कई अस्पताल 24 घंटे ब्लड बैंक सेवाएं संचालित करते हैं और रक्त संग्रह व उपलब्धता निर्धारित चिकित्सकीय नियमों के तहत होती है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मोबाइल की EMI का भुगतान नहीं हुआ था तो उसकी वसूली के लिए संबंधित व्यक्ति के साथ किस तरह की कार्रवाई की गई और उसे ब्लड बैंक तक क्यों ले जाया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला सिर्फ EMI की रिकवरी का नहीं बल्कि व्यक्ति की गरिमा, सहमति और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।
