फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच हुई अहम फोन बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित और खुला रखने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद बताया कि दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य में “सुरक्षा और आवागमन की स्वतंत्रता को तुरंत बहाल करना जरूरी है।” यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इसकी बंदी का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और अमेरिका-ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस इलाके में हालात गंभीर बने हुए हैं। कई देशों ने भी इस जलमार्ग के बंद होने पर चिंता जताई है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस इस संकट के समाधान के लिए आपसी सहयोग जारी रखेंगे और वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने की दिशा में प्रयास तेज करेंगे।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप के बीच तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, जहां किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मच सकती है। ऐसे में मैक्रों और मोदी की यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
