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महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव 2026: महायुति बनाम महाआघाड़ी — बीएमसी से लेकर 29 महानगर पालिकाओं तक सियासी प्रतिस्पर्धा तेज

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महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनावों में राजनीतिक गरमाहट लगातार बढ़ती जा रही है, खासकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के महा-चुनाव को लेकर। यह चुनाव केवल स्थानीय शहरी सत्ता का फैसला नहीं करेगा, बल्कि राज्य में अगले वर्षों की सियासी दिशा और प्रतिष्ठा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इस बार महायुति और महा-आघाड़ी की मुख्य टक्कर देखने को मिल रही है, जिसमें बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी (महायुति) अपने विशाल गठबंधन के साथ विपक्षी यूबीटी शिवसेना, मनसे, कांग्रेस-वंचित और अन्य लोकल दलों के खिलाफ मैदान में हैं।

बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं और किसी भी गठबंधन को 114 सीटों का बहुमत चाहिए होगा। महायुति ने बीएमसी और अन्य महानगर पालिकाओं में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीति बनायी है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि महापौर मराठी होने चाहिए और स्थानीय पहचान को चुनावी मुद्दे के रूप में उठाया जा रहा है।

स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में महायुति ने महाराष्ट्र भर में पहले से ही अच्छे नतीजे दर्ज किए हैं। पिछले लोकल बॉडी चुनावों (2025) में महायुति ने 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में से 207 पदों पर बढ़त हासिल की थी, जिससे उसकी सियासी मजबूती जाहिर हुई थी।

वहीं विपक्षी महा-आघाड़ी भी कमजोर नहीं है। यूबीटी शिवसेना और मनसे ने कई महानगर पालिकाओं में सीट साझेदारी की है और कांग्रेस तथा वंचित समूह के साथ मिलकर महायुति के खिलाफ कड़ी चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच संयुक्त रणनीति की चर्चाएँ राजनीतिक गलियारों में जोरों पर हैं, हालांकि महा-आघाड़ी की रणनीति और गठबंधन के स्थिर स्वरूप पर अभी भी मतभेद और अटकलें बनी हैं।

बीएमसी के अलावा ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, नागपुर, कोल्हापुर जैसे महानगर पालिकाओं में भी मुकाबला कांटे का है जहाँ दोनों गठबंधनों ने अपने उम्मीदवारों को तैयार किया है। कई स्थानों पर क्षेत्रीय दल और वंचित समूह भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, जिससे परिणामों का पूर्वानुमान और अधिक जटिल हो गया है।

चुनाव से पहले संघर्ष सिर्फ चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं रहा; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रचार भी तेज हैं। कांग्रेस ने महायुति सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने महापालिकाओं के एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) को हटा दिया और विकास निधियों का गलत उपयोग किया है, जिससे विपक्षी दलों को प्रतिद्वंदिता में चुनौती मिल रही है।

बीएमसी चुनाव में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि भाजपा लगभग 90 सीटें जीतेगी और शिवसेना लगभग 40 सीटों पर अपनी पकड़ बनाएगी, जिससे महायुति को महापौर राज के लिए मजबूती मिलेगी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष ने NOTA (None of the Above) विकल्प में चुनाव कराने की मांग भी उठाई है, विशेषकर उन 68 सीटों पर जहाँ महायुति उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए हैं, इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला बताया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह विधानसभा चुनाव से अलग एक स्थानीय-स्तर की सामरिक लड़ाई है, जिसमें सामाजिक मुद्दे, स्थानीय पहचान, विकास वादे और गठबंधन की ताकत निर्णायक भूमिका निभाएंगे। महाराष्ट्र में इन स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम न केवल बीएमसी जैसी महत्त्वपूर्ण संस्थाओं को प्रभावित करेंगे, बल्कि 2029 के बड़े राजनीतिक परिदृश्य को भी आकार दे सकते हैं।

इसलिए 2026 के महाराष्ट्र स्थानीय निकाय और BMC चुनाव महायुति बनाम महा-आघाड़ी का मुकाबला सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, रणनीति और भविष्य के सियासी समीकरणों की परीक्षा है — जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिक गयी हैं।

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