महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सत्तारूढ़ महायुति में अंदरूनी खींचतान तेज होती नजर आ रही है। पांच सीटों पर हुए चुनाव में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि महायुति के खाते में दो सीटें आईं। खास तौर पर नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस की जीत ने भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक झटका दिया है। नतीजों के बाद गठबंधन के भीतर हार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
चुनाव परिणामों के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर अपेक्षित समर्थन नहीं देने का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा कि पुणे और नागपुर के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों से जिस तरह के समर्थन की उम्मीद थी, वह नहीं मिला। उनके मुताबिक, पुणे में आखिरी समय पर निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन देने से गठबंधन की एकजुटता प्रभावित हुई। ये आरोप भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए हैं, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर सहयोगी दलों के पक्ष को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना को मिले वोट भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में स्थानांतरित नहीं हुए। इसके अलावा, छत्रपति संभाजीनगर में महायुति के घटक दलों के बीच प्रचार को लेकर भी असहमति सामने आई। भाजपा नेताओं का दावा है कि यदि गठबंधन के सभी दलों ने एक-दूसरे के उम्मीदवारों का पूरा सहयोग किया होता, तो परिणाम अलग हो सकते थे। हालांकि, यह गठबंधन के नेताओं का राजनीतिक आकलन है, न कि चुनाव परिणामों से अपने आप साबित होने वाला तथ्य।
इस चुनावी प्रदर्शन को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी संज्ञान लिया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण से नतीजों और संगठनात्मक स्थिति को लेकर स्पष्टीकरण मांग सकती है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि हार की वजह सहयोगी दलों के बीच मतभेद थे, स्थानीय स्तर पर संगठन की कमजोरी थी या पार्टी के भीतर गुटबाजी ने परिणामों को प्रभावित किया। इस समीक्षा के बाद राज्य में संगठन और गठबंधन की रणनीति को लेकर फैसले लिए जा सकते हैं।
इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच गठबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना भी जताई गई है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के साथ वरिष्ठ नेताओं की बैठक की भी जानकारी सामने आई है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बातचीत में चुनावी नतीजों, गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेदों और भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक के अंतिम फैसलों या किसी औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि अभी सामने आई जानकारी से नहीं होती।
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों में नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। पुणे स्नातक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख ने जीत दर्ज की, जबकि छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर इसी दल के उम्मीदवार डॉ. प्रताप पाटिल विजयी रहे। दूसरी ओर, पुणे शिक्षक सीट भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक सीट शिंदे गुट की शिवसेना के उम्मीदवार किरण सरनाईक के खाते में गई।
इन नतीजों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि नागपुर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। यहां कांग्रेस की जीत ने विपक्ष को भाजपा पर सवाल उठाने का मौका दिया। वहीं, पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा की जीत से पार्टी को कुछ राहत भी मिली। कुल मिलाकर, पांच सीटों के परिणामों ने राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच मुकाबले को नया राजनीतिक मोड़ दिया है।
अब महायुति के सामने चुनावी नतीजों की समीक्षा करने और सहयोगी दलों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती है। भाजपा के आरोपों के बाद गठबंधन में बातचीत और समन्वय की जरूरत बढ़ गई है। दूसरी ओर, विपक्ष इन परिणामों को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के संकेत के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व की समीक्षा, सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों से साफ होगा कि इस चुनावी झटके का महायुति की आगे की रणनीति पर कितना असर पड़ता है।
