उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शुक्रवार 13 फरवरी 2026 को एक अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को लेकर भारी सामाजिक तनाव देखा गया, जिस कारण प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। मेरठ के गंगानगर क्षेत्र की युवती आकांक्षा गौतम और दूसरे समुदाय के युवक शहवाज़ राणा के बीच प्रस्तावित विवाह को लेकर स्थानीय स्तर पर व्यापक विवाद फैल गया था। यह शादी आज मवाना रोड स्थित पैराडाइज बैंक्विट हॉल में होनी थी, लेकिन विवाद बढ़ने और तनाव का अंदेशा जताए जाने पर विवाह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
स्थानीय हिंदू संगठनों और कुछ नेताओं ने इस विवाह को “लव जिहाद” का मामला करार देते हुए हिंदू महापंचायत बुलाने का आह्वान किया। इसके चलते मेरठ प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा को लेकर पहले से अलर्ट जारी कर दिया और कई संगठनों के लोगों पर नजर रखी।
बुधवार रात को ही पुलिस ने हिंदू रक्षा दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी को गाजियाबाद में उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर लिया ताकि महापंचायत बुलाने वाले नेताओं का कार्यक्रम प्रभावित न हो और कानून–व्यवस्था को नुकसान न पहुंचे। अतिरिक्त रूप से, हिन्दू सुरक्षा संगठन के अन्य प्रगतिशील कार्यकर्ताओं समेत सचिन सिरोही को भी वश में रखा गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
समय के साथ विवाद बढ़ा तब पैराडाइज बैंक्विट के संचालक ने प्रशासन और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए शादी स्थल की बुकिंग रद्द कर दी और वहां अब महापंचायत नहीं होने देनी की जानकारी पुलिस को लिखित रूप से दी गई। इस कारण से निर्धारित विवाह कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया गया है।
विवेकपूर्ण स्थिति बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात कर दी है और सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी भ्रामक जानकारी पर भी नजर रखी जा रही है ताकि सामाजिक शांति में किसी भी तरह का उलंघन न हो।
आकांक्षा की मां और स्वयं आकांक्षा ने विवाद के आरोपों को खण्डित करते हुए कहा है कि यह विवाह उनकी आज़ादी और इच्छानुसार किया जा रहा है और कहीं भी “लव जिहाद” जैसे आरोप वास्तविकता नहीं बने। परिवार ने कहा कि विषय पर कानूनी सहायता लेने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने पर विचार कर रहे हैं।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक और धार्मिक प्रतिष्ठानों के बीच व्यक्तिगत जीवन के फैसलों को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं और प्रशासन को ऐसे मामलों में सामुदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सख्त उपाय अपनाने पड़ रहे हैं।
