मध्य पूर्व में जारी तनाव और सैन्य संघर्ष का असर अब समुद्री व्यापार मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ओर आ रहे एक थाई मालवाहक जहाज पर हमला होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज गुजरात के कांडला पोर्ट की ओर जा रहा था, तभी रास्ते में उस पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया, जिसके बाद जहाज में जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई। इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और आसपास मौजूद नौसेना बलों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
बताया जा रहा है कि इस जहाज का नाम “मयूरी नारी” (Mayuree Naree) है, जो थाईलैंड के झंडे वाला एक बड़ा बल्क कैरियर है। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के खलीफा पोर्ट से रवाना होकर भारत के गुजरात स्थित कांडला बंदरगाह की ओर जा रहा था। जब जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था, तभी उस पर दो प्रोजेक्टाइल या मिसाइल जैसे हथियारों से हमला किया गया। इस हमले से जहाज के इंजन रूम और पिछले हिस्से में विस्फोट हुआ, जिससे उसमें आग लग गई और घना धुआं उठने लगा।
घटना के बाद ओमान की नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया। जहाज पर कुल 23 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें से 20 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हालांकि कुछ क्रू मेंबर अभी भी जहाज पर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास जारी हैं। घायल लोगों को नजदीकी तटीय इलाके में ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया गया।
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह हमला ओमान के उत्तरी तट से करीब 11 नॉटिकल मील दूर हुआ। इस क्षेत्र में हाल के दिनों में कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी पुष्टि की है कि उसी दिन होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तीन अलग-अलग जहाजों को निशाना बनाया गया था। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से नहीं ली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा खतरा बढ़ गया है और कई देशों ने अपने जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब केवल जमीन या हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्री मार्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में भारत सहित कई देशों की व्यापारिक आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
