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मोहम्मद रिजवान पर PCB का बड़ा फैसला, जांच के बीच मीडिया से बात करने की नहीं मिली अनुमति

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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान को लेकर चल रहे विवाद में नया अपडेट सामने आया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने रिजवान को अपने खिलाफ चल रही जांच के मामले में सार्वजनिक तौर पर मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिजवान ने बोर्ड से दो अलग-अलग मौकों पर सार्वजनिक बयान देने की इजाजत मांगी थी, लेकिन दोनों बार उनका अनुरोध ठुकरा दिया गया। रिजवान इस मामले में अपना पक्ष जनता के सामने रखना चाहते थे।

मामला पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की जांच से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े आरोपों तथा कुछ वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। इस जांच में रिजवान और पाकिस्तान के बल्लेबाज इमाम-उल-हक से पूछताछ की गई है। दोनों खिलाड़ियों के मोबाइल फोन भी जांच के लिए कब्जे में लिए गए थे और उनके डिवाइस की फॉरेंसिक जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ जांच में अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष या दोष सिद्ध होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

रिजवान ने PCB से अनुमति इसलिए मांगी थी ताकि वह पूरे विवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। रिपोर्ट के मुताबिक, वह यह बताना चाहते थे कि उनके मोबाइल फोन को किन परिस्थितियों में कब्जे में लिया गया और NCCIA की जांच को लेकर उनके क्या सवाल हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की एंटी करप्शन यूनिट को भेजे गए अपने पत्र के बारे में भी सार्वजनिक रूप से जानकारी देना चाहते थे। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रिजवान का उद्देश्य PCB या किसी अन्य संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि घटनाक्रम और अपना पक्ष सामने रखना था।

PCB की ओर से अनुमति नहीं मिलने के पीछे खिलाड़ियों के केंद्रीय अनुबंध की शर्तों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय अनुबंध के क्लॉज 4.1 के तहत किसी अनुबंध से जुड़े मामले पर सार्वजनिक बयान देने से पहले खिलाड़ी को बोर्ड की अनुमति लेनी होती है। रिजवान ने इसी प्रावधान के तहत बोर्ड से अनुमति मांगी थी, लेकिन दोनों बार उन्हें इजाजत नहीं मिली। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रिजवान ने अनुबंध के एक अन्य प्रावधान का हवाला देते हुए बोर्ड और खिलाड़ी के बीच सहयोग की बात रखी थी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत इंग्लैंड दौरे के दौरान हुई घटनाओं के बाद हुई। लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच के बाद रिजवान और इमाम-उल-हक समेत पाकिस्तान के कुछ खिलाड़ियों को टीम से रिलीज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को NCCIA के सामने पेश होना पड़ा। जांच के दौरान मोबाइल फोन कब्जे में लिए जाने का मामला भी सामने आया। पाकिस्तान मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, रिजवान का फोन अभी तक वापस नहीं किया गया है।

रिजवान के वकील ने लाहौर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मोबाइल फोन जब्त किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच के बाद रिजवान को होटल की लॉबी में बुलाकर पूछताछ की गई और उनका फोन यह कहकर लिया गया था कि कुछ समय बाद वापस कर दिया जाएगा। वकील ने अदालत में दावा किया कि फोन अभी तक वापस नहीं किया गया है। इन दावों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अलग से सामने आना बाकी है।

रिपोर्टों के अनुसार, रिजवान ने ICC की एंटी करप्शन यूनिट से भी मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। वह यह जानना चाहते थे कि क्या उनके मोबाइल फोन को कब्जे में लेने की कार्रवाई की जानकारी ICC या इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड की संबंधित एंटी करप्शन इकाई को थी। उन्होंने कथित तौर पर फोन जब्त करने, संबंधित एजेंसी को सौंपने और उसकी फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

इस बीच रिजवान ने NCCIA की जांच को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने एजेंसी से यह स्पष्ट करने की मांग की कि उनके खिलाफ किस तरह के आरोपों की जांच की जा रही है और उन्हें जांच में सहयोग करने के लिए पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। दूसरी ओर, रिजवान की ओर से NCCIA की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर लाहौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जहां उनकी याचिका खारिज होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद एजेंसी की जांच जारी है।

फिलहाल PCB इस मामले में जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही खिलाड़ियों के खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई पर फैसला लिए जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है। ऐसे में मोहम्मद रिजवान की ओर से सार्वजनिक बयान देने की कोशिश और PCB द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले रिजवान या इमाम-उल-हक को सट्टेबाजी या जुए से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

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