राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि भारत की असली पहचान और उसकी “आत्मा” को सबसे ज्यादा संरक्षित रखने का काम आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने किया है। उन्होंने यह बात एक कार्यक्रम में कही, जहां समाज के विभिन्न वर्गों की भूमिका और योगदान पर चर्चा की गई।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास में विदेशी आक्रमणों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन समुदायों ने देश की सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन वर्गों को अक्सर समाज के हाशिए पर माना जाता है, वही असल में भारत की परंपराओं और मूल्यों के सच्चे रक्षक रहे हैं।
उन्होंने समाज के अन्य वर्गों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तथाकथित “शिक्षित और विकसित” वर्ग समय के साथ इन समुदायों से दूर होता चला गया है। भागवत ने इस दूरी को खत्म करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि समाज में संतुलन और समानता स्थापित हो सके।
अपने भाषण में उन्होंने “सेवा” के महत्व को भी रेखांकित किया। उनका कहना था कि समाज की सेवा करना कोई उपकार नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिए काम करता है, तो इससे उसका खुद का विकास भी होता है और समाज भी मजबूत बनता है।
भागवत ने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति “सबको साथ लेकर चलने” की भावना पर आधारित है। ऐसे में जरूरी है कि आदिवासी और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें समान अवसर दिए जाएं। उन्होंने सरकार और समाज दोनों से अपील की कि इन समुदायों के विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे, जहां “कर्मयोगी पुरस्कार” समारोह के दौरान समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भागवत के इस बयान को सामाजिक समरसता और समावेशिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान वर्तमान समय में सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। खासकर तब, जब देश में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद और सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, मुंबई में दिया गया भागवत का यह संदेश सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच पुल बनाने और भारत की सांस्कृतिक जड़ों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
