Site icon Prsd News

सैटेलाइट मैप में पूरा भारत क्यों दिख रहा सफेद? जानिए मानसून के नए चरण और बादलों की चादर का वैज्ञानिक कारण

images 1 20

देशभर में इन दिनों मानसून पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली सैटेलाइट तस्वीरों में देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में मौसम विभाग और विभिन्न मौसम एजेंसियों द्वारा जारी क्लाउड मैप में लगभग पूरा भारत सफेद रंग की मोटी परत से ढका दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर पूरा भारत एक साथ सफेद क्यों दिख रहा है और क्या इसका मतलब देशभर में लगातार बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका संबंध मानसून के सक्रिय चरण (Active Monsoon Phase) से है, जब देश के बड़े हिस्से पर घने वर्षा वाले बादल फैल जाते हैं और सैटेलाइट चित्रों में पूरा क्षेत्र सफेद दिखाई देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सैटेलाइट क्लाउड मैप में सफेद रंग का अर्थ बर्फ नहीं होता, बल्कि यह ऊंचाई तक विकसित हुए घने बादलों को दर्शाता है। जब मानसूनी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी लेकर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैलती हैं, तब विशाल क्षेत्र में क्यूम्यूलोनिम्बस और अन्य घने वर्षा वाले बादल बनते हैं। यही बादल सैटेलाइट से देखने पर सफेद चादर की तरह दिखाई देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थान पर एक जैसी बारिश हो रही है, बल्कि यह दर्शाता है कि वातावरण में नमी और बादलों का विस्तार बहुत अधिक है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस समय उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और देश के कई अन्य हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी से बने निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी ट्रफ की अनुकूल स्थिति के कारण लगातार नमी मिल रही है। यही वजह है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का व्यापक विस्तार दिखाई दे रहा है। कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी बनी हुई है।

मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मानसून पूरे सीजन में एक जैसा नहीं रहता। कभी यह कमजोर पड़ जाता है, जिससे बादलों की संख्या कम हो जाती है, जबकि सक्रिय चरण में बादल तेजी से बढ़ते हैं और कई हजार किलोमीटर तक फैले दिखाई देते हैं। कुछ सप्ताह पहले तक देश के कई हिस्सों में मानसून कमजोर था और सैटेलाइट तस्वीरों में बादल कम नजर आ रहे थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अंतरिक्ष से ली गई नई तस्वीरें बताती हैं कि मानसून ने दोबारा ताकत पकड़ ली है और बादलों का घनत्व काफी बढ़ गया है।

विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि क्लाउड मैप में पूरा भारत सफेद दिखने का अर्थ यह नहीं कि हर शहर या जिले में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। कई स्थानों पर केवल बादल छाए हो सकते हैं, कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कहीं भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। वर्षा की वास्तविक मात्रा स्थानीय मौसम प्रणाली, तापमान, हवा की दिशा और स्थलाकृति जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल सैटेलाइट चित्र देखकर किसी एक स्थान की बारिश का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों पर लगातार नजर रखें। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है वहां जलभराव, भूस्खलन, तेज हवाओं और अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। किसानों को भी मौसम आधारित सलाह का पालन करने की सलाह दी गई है ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मानसून का यह सक्रिय चरण कुछ दिनों तक जारी रहता है तो देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की स्थिति और बेहतर हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों और जलाशयों को भी लाभ मिलेगा।

Exit mobile version