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नाना पाटेकर के निधन से सदमे में महिम के पड़ोसी, बोले- इतने बड़े स्टार बने, लेकिन कभी नहीं दिखाया रुतबा

nana patekar friend and neighbour

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ मुंबई के महिम इलाके में भी शोक का माहौल है। जिस सोसाइटी में नाना ने अपने जीवन के कई साल बिताए, वहां के लोग आज भी उनसे जुड़ी यादों को साझा कर रहे हैं। पड़ोसियों के मुताबिक, नाना ने फिल्मों में बड़ी पहचान हासिल करने के बाद भी अपने व्यवहार में कभी स्टार वाला घमंड नहीं आने दिया। वह आम लोगों की तरह सबसे मिलते-जुलते थे और पुराने रिश्तों को हमेशा अहमियत देते थे।

नाना पाटेकर मुंबई के महिम वेस्ट स्थित नव सहयोग सोसाइटी के बी-विंग में ग्राउंड फ्लोर के एक फ्लैट में रहते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनका इस सोसाइटी से करीब चार दशक तक जुड़ाव रहा। उनका बचपन यहीं बीता और फिल्मी दुनिया में पहचान बनाने के बाद भी वह अपने पुराने घर और आसपास के लोगों से जुड़े रहे। सोसाइटी के सदस्यों के मुताबिक, उनके परिवार का भी पड़ोसियों के साथ अच्छा रिश्ता था।

पड़ोसी चंद्रेश शाह ने नाना को याद करते हुए बताया कि वह उन्हें 1970 से जानते थे। उनके मुताबिक, नाना ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में बड़े अभिनेता बने, लेकिन उनका व्यवहार हमेशा सामान्य इंसान जैसा ही रहा। वह सोसाइटी के लोगों से खुलकर बात करते थे और किसी के साथ भेदभाव नहीं करते थे। शाह ने कहा कि नाना हमेशा लोगों को मिल-जुलकर रहने की सलाह देते थे।

नाना का अपने पुराने घर से जुड़ाव त्योहारों के दौरान भी दिखाई देता था। पड़ोसियों के मुताबिक, वह गणेशोत्सव के समय अक्सर सोसाइटी आते थे और अपने घर पर गणपति की स्थापना करते थे। इस दौरान वह पूजा और सजावट से जुड़े कामों में भी हिस्सा लेते थे। लोगों ने बताया कि लोकप्रिय अभिनेता बनने के बाद भी वह सोसाइटी के कार्यक्रमों में आम सदस्य की तरह शामिल होते थे और पुराने परिचितों के साथ समय बिताते थे।

सोसाइटी में रहने वाले राजेंद्र पेडमकर ने बताया कि नाना गणेशोत्सव और नवरात्रि के दौरान यहां आते थे। वह बच्चों के साथ क्रिकेट भी खेलते थे और लोगों के साथ हंसी-मजाक करते थे। उनके मुताबिक, नाना का स्वभाव मिलनसार था, हालांकि वह अनुशासन को भी काफी महत्व देते थे। पड़ोसियों के लिए उनका जाना केवल एक प्रसिद्ध अभिनेता का निधन नहीं, बल्कि पुराने पड़ोसी और परिवार जैसे व्यक्ति को खोने जैसा है।

नाना के परिवार और सोसाइटी के लोगों के बीच रिश्ते कितने करीबी थे, इसका जिक्र एक अन्य निवासी विजयलक्ष्मी मेर ने भी किया। उन्होंने बताया कि नाना और उनका परिवार पड़ोसियों के साथ पारिवारिक संबंधों की तरह रहता था। नाना त्योहारों के दौरान लोगों के घर जाते थे, उनके साथ खाना खाते थे और गरबा जैसे आयोजनों में भी हिस्सा लेते थे। उनके मुताबिक, नाना ने कभी अपनी लोकप्रियता को लोगों से दूरी बनाने की वजह नहीं बनने दिया।

नाना पाटेकर के घर में करीब 35 साल तक घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली शालूबाई ससाने के परिवार ने भी उनके सरल स्वभाव और मददगार रवैये को याद किया। उनके बेटे दिलीप ससाने के मुताबिक, नाना उनकी मां को परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देते थे और जरूरतमंद लोगों की मदद भी करते थे। उनके घर के आसपास रहने वाले गरीब लोगों के साथ भी नाना बातचीत करते और उनके बीच समय बिताते थे।

फिल्मी दुनिया में नाम कमाने के बाद नाना ने अंधेरी में भी फ्लैट खरीदा, लेकिन महिम की सोसाइटी से उनका रिश्ता बना रहा। पड़ोसियों का कहना है कि मां के निधन और बाद में पुणे के पास फार्महाउस में रहने के कारण उनका यहां आना-जाना कम हो गया था। इसके बावजूद गणेशोत्सव और दूसरे खास मौकों पर लोग उनके आने का इंतजार करते थे।

नाना पाटेकर की पहचान उनके दमदार अभिनय और यादगार किरदारों के लिए रही, लेकिन महिम के पड़ोसियों की यादों में उनकी एक अलग तस्वीर भी मौजूद है—एक ऐसा व्यक्ति जो शोहरत हासिल करने के बाद भी अपने पुराने लोगों और जगह को नहीं भूला। उनके निधन के बाद सामने आ रहे ये किस्से बताते हैं कि स्थानीय लोगों के लिए नाना केवल बड़े पर्दे के सितारे नहीं, बल्कि उनके अपने परिवार और मोहल्ले का हिस्सा भी थे।

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