प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने और भारत-फ्रांस संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से फ्रांस पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता और प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फ्रांस पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों और स्थानीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और नई तकनीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग के चलते राफे लड़ाकू विमान सौदे सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पहले ही चर्चा का विषय रही हैं। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर भी दोनों देश करीबी साझेदार माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच होने वाली बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी है। हालांकि भारत G7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के इस मंच पर भारत को लगातार विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मामलों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। इन बैठकों में व्यापारिक सहयोग बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकी साझेदारियों को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यही वजह है कि वैश्विक मंचों पर उसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। G7 सम्मेलन भारत को अपनी आर्थिक उपलब्धियों, विकास मॉडल और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर भी देगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में यह दौरा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता, रूस-यूक्रेन संघर्ष और बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत संतुलित कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। फ्रांस के साथ मजबूत संबंध और G7 मंच पर सक्रिय भागीदारी भारत की इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा मिल सकती है बल्कि कई वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूती के साथ सामने रखने का अवसर मिलेगा। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और घोषणाओं से यह स्पष्ट होगा कि यह दौरा दोनों देशों के सहयोग और वैश्विक कूटनीति के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित होता है।
