
एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में शामिल विवादित अध्याय को लेकर सियासी और न्यायिक हलकों में उठे विवाद के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नाराजगी जताई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और “हमें इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि देश के बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है।”
बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तय करते समय अधिक सतर्कता बरती जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूली बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली सामग्री उनकी आयु, मानसिक स्तर और संवेदनशीलता के अनुरूप होनी चाहिए।
यह विवाद National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से संबंधित एक अध्याय को लेकर शुरू हुआ। इस अध्याय की कुछ सामग्री को लेकर आपत्ति जताई गई थी और मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया।
इस मुद्दे पर Supreme Court of India में भी सुनवाई हुई, जहां अदालत ने शैक्षणिक सामग्री की प्रकृति और उसकी भाषा को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई जाने वाली सामग्री अत्यंत संतुलित और जिम्मेदार होनी चाहिए, क्योंकि वही भविष्य में उनके विचारों की नींव बनती है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालय से यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी किसी भी त्रुटि से बचने के लिए पाठ्यक्रम की समीक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जाए। साथ ही, विवादित अंशों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने के संकेत भी दिए गए हैं।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि पुस्तक के विवादित हिस्से की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी स्तर पर आंतरिक समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री संविधानिक मूल्यों और संस्थाओं की गरिमा के अनुरूप हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा नीति, संस्थाओं की साख और बच्चों के बौद्धिक विकास से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर और सख्त दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।



