ईरान की प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की तबीयत अचानक बिगड़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। जेल में बंद मोहम्मदी को गंभीर स्वास्थ्य संकट के बाद तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी हालत “बेहद गंभीर” बताई जा रही है और उन्हें दिल से जुड़ी गंभीर समस्या यानी कार्डियक क्राइसिस का सामना करना पड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, मोहम्मदी को जेल में कई बार बेहोशी के दौरे पड़े और उनका ब्लड प्रेशर काफी अस्थिर हो गया था। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें तत्काल जेल से अस्पताल ले जाना पड़ा। उनके परिवार और फाउंडेशन का कहना है कि उन्हें लंबे समय से उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही थी, जिससे उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
मोहम्मदी पिछले कई वर्षों से ईरान में मानवाधिकार, महिलाओं के अधिकार और मृत्युदंड के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। इसी कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और वर्तमान में वह जेल में सजा काट रही हैं।
हाल ही में उन्हें एक और मामले में अतिरिक्त सजा सुनाई गई थी, जिससे उनकी कैद की अवधि और बढ़ गई है। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि उन्हें पहले से दिल से जुड़ी समस्याएं थीं। जेल में रहते हुए उन्हें सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, तेजी से वजन कम होना और बार-बार बेहोशी जैसी गंभीर दिक्कतें हो रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें पहले भी हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस हुए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध नहीं कराया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। नॉर्वे की नोबेल कमेटी और कई मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार से अपील की है कि मोहम्मदी को तुरंत रिहा किया जाए ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सके। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिली, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
मोहम्मदी के परिवार ने भी ईरान सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है और कहा है कि जेल में उनका रहना “मौत की सजा” के समान है। परिवार का कहना है कि उन्हें किसी बड़े और विशेषज्ञ अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए, जहां उनका सही इलाज हो सके।
यह मामला एक बार फिर दुनिया के सामने यह सवाल खड़ा करता है कि राजनीतिक कैदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में किस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। नरगिस मोहम्मदी की बिगड़ती हालत ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
