महाराष्ट्र के बहुचर्चित नासिक TCS केस में अब बड़ा राजनीतिक मोड़ आ गया है। इस मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही निदा खान को लेकर पुलिस जांच में ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पुलिस का दावा है कि फरार चल रही निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर में AIMIM के पार्षद मतीन पटेल ने पनाह दी थी। इस खुलासे के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है तथा अब राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी तेज हो गए हैं।
नासिक पुलिस की जांच के अनुसार निदा खान पिछले कई दिनों से फरार थी और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगी हुई थीं। आखिरकार पुलिस ने गुप्त निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने करीब चार दिनों तक उस लोकेशन पर नजर रखी थी जहां निदा खान छिपी हुई थी। कार्रवाई के दौरान करीब 20 पुलिसकर्मी सादी वर्दी में तैनात किए गए थे ताकि किसी को भनक न लगे। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि पुलिस जांच में AIMIM पार्षद मतीन पटेल का नाम सामने आया।
आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ निदा खान को अपने ठिकाने पर पनाह दी, बल्कि उसे पुलिस कार्रवाई से बचाने की भी कोशिश की। पुलिस ने मतीन पटेल को नोटिस जारी कर पूछताछ शुरू कर दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है। यह मामला मूल रूप से नासिक स्थित TCS कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के आरोपों से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक मार्च और अप्रैल 2026 के बीच कुल नौ FIR दर्ज की गई थीं।
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ कर्मचारियों ने महिला सहकर्मियों पर मानसिक दबाव बनाया, धार्मिक किताबें दीं और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी। निदा खान इस केस की प्रमुख आरोपियों में शामिल है। वह TCS के नासिक BPO यूनिट में कार्यरत थी और पुलिस के अनुसार कई पीड़ितों से उसका सीधा संपर्क था। इससे पहले अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस केस में सिर्फ स्थानीय स्तर का नेटवर्क नहीं बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह की आशंका भी सामने आ रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक कहा गया कि जांच में “अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट” जैसे संकेत मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस बारे में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है।
विपक्षी दल AIMIM पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि अगर किसी जनप्रतिनिधि ने फरार आरोपी को संरक्षण दिया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं AIMIM की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। महाराष्ट्र सरकार के कुछ मंत्रियों ने भी इस मामले की SIT जांच को और विस्तृत करने की मांग की है। मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि निदा खान सिर्फ एक मोहरा हो सकती है और असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना बेहद जरूरी है।
उन्होंने इस पूरे मामले में राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच की मांग उठाई। इस बीच TCS ने भी अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू की है। कंपनी ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं POSH नियमों के पालन को लेकर सख्त है।
अब पुलिस की नजर इस बात पर है कि फरारी के दौरान निदा खान किन-किन लोगों के संपर्क में थी और क्या उसे भागने में किसी बड़े नेटवर्क ने मदद की। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में कई और नाम सामने आ सकते हैं। इसी वजह से इस केस को महाराष्ट्र के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।
