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NEET पेपर लीक पर छात्रों का गुस्सा फूटा, जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का बड़ा प्रदर्शन

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प्रदर्शन का नेतृत्व CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ियों और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ने लाखों युवाओं को मानसिक तनाव में धकेल दिया है। दिपके ने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने की अपील भी की।

जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने थाली और चम्मच बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया था। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में पोस्टर, संविधान की प्रतियां और शिक्षा सुधार की मांग वाले बैनर लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य बार-बार परीक्षा घोटालों की भेंट चढ़ रहा है और इसके खिलाफ अब देशव्यापी आवाज उठनी चाहिए।

इस आंदोलन को और बल तब मिला जब हाल के दिनों में कई NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या की खबरें सामने आईं। छात्र संगठनों और CJP नेताओं का दावा है कि परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता और भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता ने कई छात्रों को गहरे मानसिक दबाव में डाल दिया। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मृतक छात्रों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भले ही एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह युवाओं के असंतोष की एक बड़ी आवाज बनती दिखाई दे रही है। बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों को लेकर यह संगठन लगातार सरकार को घेर रहा है। सोशल मीडिया पर इसके करोड़ों समर्थक बताए जा रहे हैं और हाल के प्रदर्शनों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं की व्यापक नाराजगी का प्रतीक बन चुका है। शिक्षा, रोजगार और अवसरों की कमी को लेकर बढ़ती बेचैनी अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और संबंधित एजेंसियां छात्रों की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं निकाल पाती हैं, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि देश का युवा वर्ग अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अब खुलकर आवाज उठाने को तैयार है।

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