NEET UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद जहां हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले पंशुल बंसल ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि उस समय उनके सामने दो विकल्प थे—प्रदर्शन में शामिल होना या दोबारा परीक्षा की तैयारी पर पूरा ध्यान देना। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना और उसी का परिणाम रहा कि उन्होंने री-NEET परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में दूसरी रैंक हासिल की। पंशुल का कहना है कि परिस्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं थीं, लेकिन अपनी मेहनत और तैयारी पर ध्यान देना पूरी तरह उनके हाथ में था।
पंशुल बंसल ने बताया कि जब NEET परीक्षा रद्द होने की घोषणा हुई तो उन्हें भी गहरा झटका लगा था। कई महीनों की मेहनत एक पल में व्यर्थ होती दिखाई दी और स्वाभाविक रूप से निराशा हुई। हालांकि उन्होंने जल्द ही खुद को संभाला और यह फैसला किया कि विरोध प्रदर्शन में समय देने के बजाय दोबारा मिलने वाले अवसर का अधिकतम लाभ उठाया जाए। उनका मानना था कि यदि परीक्षा फिर से होनी ही है, तो बेहतर तैयारी कर अपनी रैंक और अंक दोनों सुधारे जा सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई की रणनीति बदली और कमजोर विषयों पर अतिरिक्त मेहनत शुरू कर दी।
री-NEET परीक्षा में पंशुल ने अपने पहले के प्रदर्शन से भी बेहतर अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने का अनुमान था, जबकि दोबारा आयोजित परीक्षा में उन्होंने 715 अंक प्राप्त किए। इस सुधार ने उन्हें देशभर में AIR-2 दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा रद्द होने को दुर्भाग्य मानकर हार नहीं मानी, बल्कि उसे अपनी तैयारी को और मजबूत करने का अवसर समझा। यही सकारात्मक सोच उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
हाल के दिनों में जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा क्यों नहीं लिया, तो पंशुल ने स्पष्ट जवाब दिया कि उन्होंने घर पर रहकर पढ़ाई करना अधिक उचित समझा। उनके अनुसार, यदि वह प्रदर्शन में शामिल होते तो तैयारी के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य डॉक्टर बनना था और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाई पर केंद्रित रखा। उन्होंने यह भी कहा कि हर छात्र अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेता है और उन्होंने वही रास्ता चुना जो उन्हें सही लगा।
पंशुल की सफलता के पीछे अनुशासित दिनचर्या, नियमित मॉक टेस्ट और समय प्रबंधन की भी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने बताया कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही सफलता की गारंटी नहीं होता, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि किस विषय पर कितना समय देना है। उन्होंने कठिन विषयों पर विशेष ध्यान दिया और लगातार अपनी गलतियों का विश्लेषण करते रहे। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए आत्मविश्वास बनाए रखना उतना ही आवश्यक है जितनी मेहनत करना।
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद पंशुल बंसल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्हें उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी गई। पंशुल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन किसी भी कठिन परिस्थिति में छात्रों को अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए। उनका मानना है कि समस्याओं के समाधान के लिए संस्थागत और संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना भी आवश्यक है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पंशुल बंसल की कहानी केवल एक टॉपर की सफलता नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और सकारात्मक सोच बनाए रखने का उदाहरण भी है। NEET 2026 परीक्षा को लेकर हुए विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बीच उनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि चुनौतियों के बावजूद निरंतर मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़कर सफलता हासिल की जा सकती है। हालांकि, दूसरी ओर बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अपने सवाल और चिंताएं भी उठाते रहे हैं। ऐसे में यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
