भारत में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय वाहन तस्करी रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसे ‘ऑपरेशन नमखोर’ के नाम से जाना जा रहा है। इस जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों में भूटान के रास्ते 15,000 से ज्यादा गाड़ियां भारत में बिना कस्टम ड्यूटी और टैक्स चुकाए लाई गईं और देश के अलग-अलग राज्यों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए रजिस्टर कर दी गईं। इस मामले ने न केवल सरकारी एजेंसियों को चौंकाया है, बल्कि इसमें हाई-प्रोफाइल लोगों और फिल्मी सितारों के नाम भी सामने आने से मामला और संवेदनशील बन गया है।
दरअसल, ऑपरेशन नमखोर की शुरुआत 2025 में केरल के कोच्चि स्थित कस्टम (प्रिवेंटिव) विभाग ने की थी। इसका उद्देश्य भूटान से अवैध रूप से भारत लाई जा रही लग्जरी और सेकेंड हैंड गाड़ियों के नेटवर्क का पर्दाफाश करना था। जांच में पाया गया कि तस्कर महंगे SUV और हाई-एंड वाहनों को भूटान से भारत लाते थे और फिर उन्हें उत्तर-पूर्वी राज्यों में फर्जी कागजात के जरिए रजिस्टर करवा देते थे, जिससे आयात शुल्क और टैक्स से बचा जा सके।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस रैकेट में कई तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। कुछ मामलों में गाड़ियों को “डिप्लोमैटिक उपयोग” या “आर्मी डिस्पोजल” के नाम पर दिखाया गया, जिससे उन्हें टैक्स में छूट मिल सके। बाद में डिजिटल जांच के दौरान ये सभी दस्तावेज नकली पाए गए।
इस पूरे मामले का दायरा बेहद बड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, केवल असम में ही 400 से ज्यादा ऐसी गाड़ियों की पहचान हुई है, जबकि केरल में 50 से ज्यादा वाहनों को जब्त किया जा चुका है। शुरुआती जांच में करीब 30-40 गाड़ियों से शुरुआत हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह संख्या हजारों में पहुंच गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट की पहुंच आम लोगों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक रही। जांच के दौरान कुछ नामचीन फिल्मी सितारों के पास भी ऐसी गाड़ियां मिलने की बात सामने आई, हालांकि एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सभी खरीदारों की भूमिका की जांच की जा रही है और यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इस फर्जीवाड़े की जानकारी हो।
इस केस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग लिया जा रहा है। भूटान की कस्टम एजेंसी की टीम भारत पहुंच चुकी है और दोनों देशों के बीच साझा जांच चल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गाड़ियां सीमा पार कैसे हुईं और किन-किन चैनलों का इस्तेमाल किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल वाहन तस्करी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक अपराध है, जिसमें सैकड़ों करोड़ रुपये के टैक्स की चोरी हुई है। इसके अलावा, यह भी संकेत मिलता है कि देश की रजिस्ट्रेशन और कस्टम व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर संगठित गिरोह लंबे समय से सक्रिय थे।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन नमखोर’ ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो सीमा पार तस्करी, फर्जी दस्तावेज और टैक्स चोरी के जरिए वर्षों से काम कर रहा था। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारियां तय करेंगी कि इस पूरे रैकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं।
