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पद्म पुरस्कार 2026 में अच्युतानंदन-शिबू सोरेन का शामिल होना

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भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों (Padma Awards 2026) की विस्तृत सूची जारी की, जिसमें कुल 131 प्रतिष्ठित विभूषणों में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को सम्मानित किया गया है। कला, खेल, समाज सेवा, विज्ञान और सार्वजनिक मामलों जैसे कई क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से नवाज़ा गया है और इन नामों में कुछ ऐसे भी हैं जिनके चयन ने राजनीति के गलियारों में नई बहस को जन्म दिया है। खासकर यह कि दिवंगत वामपंथी नेता वी.एस. अच्युतानंदन (V.S. Achuthanandan) और झारखंड के संस्थापक नेता शिबू सोरेन (Shibu Soren) को सम्मानित किया गया है, जिनका राजनीति में बीजेपी से पुराना वैचारिक टकराव रहा है।

वी.एस. अच्युतानंदन, जो केरल के प्रसिद्ध सीपीएम नेता और पूर्व मुख्यमंत्री थे, ने अपने जीवन में बीजेपी-आरएसएस (RSS) की कट्टर आलोचना की थी और लम्बे समय तक विपक्षी भूमिका निभाई। ऐसे में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का निर्णय राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिये से केरल विधानसभा चुनावों से पहले नए समीकरण बनाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा के लिए यह कदम लेफ्ट समर्थकों में सकारात्मक संदेश भेजने का प्रयास माना जा रहा है, यह उम्मीद जताई जा रही है कि इससे भाजपा को दक्षिण भारत में जनाधार बढ़ाने में कुछ मदद मिल सकती है।

दूसरी ओर, झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक पहचान के धुरी रहे शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। सोरेन आदिवासी राजनीति के बेहद प्रभावशाली चेहरा थे और उन्होंने लंबे समय तक आदिवासी समुदाय के अधिकारों की आवाज़ संसद और सड़कों दोनों पर उठाई थी। उन पर हमेशा से बीजेपी की नीतियों के खिलाफ खड़े होने और झामुमो (JMM) के गठन के बाद भी केन्द्र-राज्य के रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती रही है। उनके सम्मान के बाद राजनीतिक पंडितों के बीच यह चर्चा तेज़ हुई है कि यह कदम झारखंड में बीजेपी और JMM के बीच संभावित समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ख़ासकर आदिवासी वोट बैंक को मध्य नजर रखते हुए।

पद्म पुरस्कारों की यह सूची केवल विरोधियों को सम्मान देने का ही उदाहरण नहीं है, बल्कि पहले भी कई मौकों पर भाजपा सरकार ने वैचारिक रूप से अलग-अलग विचारधाराओं और राजनैतिक पृष्ठभूमियों के लोगों को सम्मानित किया है, जैसे पिछले वर्षों में कई वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक हस्तियों को भी देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इस दीर्घ इतिहास में विश्लेषक इसे भाजपा की राजनीतिक उदारता और सर्वसमावेशी संदेश की शैली के रूप में भी देखते हैं।

सरकार की ओर से जारी इस पद्म पुरस्कार सूची में लोकप्रिय अभिनेता, खेल सितारे और वैज्ञानिकों सहित ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने देश की विविधता और उपलब्धियों को दर्शाया है। लेकिन अच्युतानंदन और शिबू सोरेन जैसे नामों पर खासकर राजनीतिक विश्लेषण और रणनीतिक मूल्यांकन की दृष्टि से चर्चा हो रही है क्योंकि यह कदम राजनीतिक संदेशों, चुनावी तैयारियों और सामाजिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।

कुल मिलाकर यह पद्म पुरस्कारों की घोषणा न सिर्फ सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मान की बात है बल्कि इस वर्ष इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है, जहाँ सम्मानित चेहरों के चयन से जुड़े राजनीतिक संकेतों को अलग-अलग राज्यों की आगामी चुनावी परिस्थितियों से जोड़ा जा रहा है और व्यापक चर्चा जारी है कि इसका कैसा प्रभाव चुनावी रणनीतियों और जनाधार पर पड़ेगा।

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