भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते टूटने का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ा है, इसे लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष नूर मोहम्मद कसूरी के मुताबिक, भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद से पाकिस्तान को करीब 40 अरब डॉलर यानी लगभग 3.78 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि भारतीय बाजार से दूरी के कारण पाकिस्तान के कारोबारियों को कच्चा माल और जरूरी सामान दूसरे देशों से मंगाना पड़ रहा है, जिससे आयात की लागत और माल पहुंचने में लगने वाला समय दोनों बढ़ गए हैं।
कसूरी ने भारत के साथ व्यापार दोबारा शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते बहाल होने से पाकिस्तान के उद्योगों को काफी राहत मिल सकती है। उनके मुताबिक, भारत से दवाइयां बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल आयात करने पर पाकिस्तान के फार्मास्युटिकल उद्योग को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर तक की बचत हो सकती है। फिलहाल वहां की कंपनियों को कई जरूरी सामग्री दूसरे बाजारों से खरीदनी पड़ती है।
पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग पर भी इसका असर पड़ने का दावा किया गया है। कसूरी के अनुसार, घरेलू स्तर पर कपास का उत्पादन घटने के कारण कपड़ा मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगानी पड़ रही है। इससे उद्योग पर करीब 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आया है। उन्होंने कहा कि भारत से कपास और दूसरे कच्चे माल की आपूर्ति होने पर परिवहन खर्च कम हो सकता है और उद्योगों को समय पर सामग्री मिल सकती है।
कसूरी ने चीनी, खाद, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा-इस्पात, सब्जियों और भारी मशीनरी जैसे सामान का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि भारत भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के काफी करीब है और इन उत्पादों की आपूर्ति वहां से होने पर दूरी वाले देशों के मुकाबले लागत कम हो सकती है। उन्होंने दोनों देशों की सरकारों से राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक अवसरों पर बातचीत करने की अपील की है। हालांकि, 40 अरब डॉलर के नुकसान का यह आंकड़ा बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष का अनुमान है और इसका स्वतंत्र रूप से सत्यापित विस्तृत हिसाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव की शुरुआत 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद और बढ़ गई थी। भारत ने पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी MFN दर्जा वापस ले लिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अगस्त 2019 में भारत के साथ व्यापार निलंबित कर दिया। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। इस तरह दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां और सीमित हो गईं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग घटनाक्रम सामने आया है। भारत और पाकिस्तान ने बांग्लादेश, नेपाल और किर्गिज गणराज्य के साथ मिलकर विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव विकासशील और कम विकसित देशों के पेशेवरों की शैक्षणिक योग्यता, लाइसेंस और काम के अनुभव को दूसरे देशों में मान्यता दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ा है। इसे 26 और 27 अक्टूबर को हुई WTO की व्यापार एवं विकास समिति की बैठकों में सामने रखा गया था।
प्रस्ताव में कहा गया है कि विकासशील देशों के पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सेवाएं देने के लिए कई तरह की नियामकीय और मान्यता संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। विकसित देशों के बीच पेशेवर योग्यताओं को मान्यता देने वाले समझौते अपेक्षाकृत अधिक प्रचलित हैं, जबकि विकासशील देशों के पास ऐसे समझौते करने के लिए जरूरी संस्थागत क्षमता और संसाधनों की कमी हो सकती है। इसलिए पांचों देशों ने WTO से तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य डॉक्टरों, इंजीनियरों और दूसरे पेशेवरों की योग्यताओं को अलग-अलग देशों में मान्यता देने की व्यवस्था विकसित करने में मदद करना है। इसके लिए शिक्षा और प्रशिक्षण के मानकों को बेहतर बनाने, योग्यता का आकलन करने तथा दूसरे देशों के साथ बातचीत करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, यह प्रस्ताव अपने आप में भारत और पाकिस्तान के बीच पेशेवरों को बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के काम करने की अनुमति देने वाला समझौता नहीं है। इसके तहत मुख्य रूप से विकासशील देशों को ऐसे पारस्परिक मान्यता समझौते तैयार करने में मदद देने की मांग की गई है।
WTO के अनुसार, इस प्रस्ताव को बांग्लादेश, भारत, किर्गिज गणराज्य, नेपाल और पाकिस्तान ने मिलकर पेश किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच कारोबार बहाल करने की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेशेवर सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दोनों ने अन्य देशों के साथ साझा पहल की है।
