मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता कराने की पहल की है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने न सिर्फ वार्ता की मेजबानी की पेशकश की है, बल्कि उसने अमेरिका की 15-सूत्रीय शांति योजना को बैक-चैनल के जरिए ईरान तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
पाकिस्तान की इस नई भूमिका को उसके बदलते वैश्विक कद के रूप में देखा जा रहा है। एक समय अमेरिका द्वारा आलोचना झेलने वाला पाकिस्तान अब वॉशिंगटन का भरोसेमंद साझेदार बनता नजर आ रहा है। इस पूरी कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि मुनीर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ इस शांति पहल को आगे बढ़ाने में पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका निभाई है।
दरअसल, पाकिस्तान इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर वह अमेरिका के साथ अपने रिश्ते सुधारना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान और सऊदी अरब के बीच संतुलन बनाए रखना भी उसके लिए जरूरी है। विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह प्रयास केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है, क्योंकि वह इस युद्ध में सीधे शामिल होने से बचना चाहता है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना चाहता है।
हालांकि, शांति वार्ता की राह आसान नहीं है। ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को “एकतरफा” बताते हुए खारिज कर दिया है और अपनी शर्तों के साथ नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके अलावा, जमीन पर जारी हमले और सैन्य तनाव भी बातचीत की संभावनाओं को कमजोर कर रहे हैं।
इसी बीच पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में एक बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने की भी तैयारी की है, जिसमें तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों को शामिल किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक अमेरिका और ईरान की सीधी भागीदारी स्पष्ट नहीं है, जिससे इस पहल की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
इसके अलावा, पाकिस्तान ने हाल ही में ईरान के साथ एक समझौते के तहत अपने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति भी हासिल की है, जिसे कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने में सफल हो रहा है।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान की भूमिका तेजी से बदलती नजर आ रही है। जहां एक ओर यह देश खुद को शांति दूत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत और बढ़ते सैन्य तनाव इस मिशन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल वास्तव में संघर्ष को कम करने में कितनी सफल हो पाती है।
