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ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने बुलाई CCS बैठक, भारत की सुरक्षा-रणनीति पर अहम समीक्षा

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पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बाद बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने देश की सुरक्षा और विदेश नीति की रणनीति पर कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक अहम बैठक बुलाई है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह बैठक रविवार, 1 मार्च 2026 की रात दिल्ली में आयोजित की जाएगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी अपने दो दिवसीय राज्य दौरे (राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी) से लौटने के तुरंत बाद भाग लेंगे और करीब रात 9:30 बजे बैठक शुरू होने की उम्मीद है। बैठक का मुख्य एजेंडा मध्य पूर्व के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

हालात तब और जटिल हो गए जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के समाचार भी शामिल हैं, जिससे दुनिया भर में तनाव की स्थितियाँ बन गईं हैं। इन हमलों और उनके बाद ईरान की प्रतिक्रिया पर भारत सरकार ने गहरी नजर रखी हुई है, और यही कारण है कि CCS बैठक में भारत की सामरिक, कूटनीतिक और आर्थिक स्थितियों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार इस उच्च-स्तरीय बैठक में रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्री सहित सुरक्षा से जुड़े मुख्य मंत्रियों की भागीदारी होगी, जो भारत की अंतरराष्ट्रीय रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा, तेल बाजार पर संभावित प्रभाव और भारत में फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही कहा है कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांतिपूर्ण समाधान, सुरक्षा और स्थिरता पर केंद्रित रही है, और इस संघर्ष के बीच भारत का दृष्टिकोण वही संतुलित और विवेकपूर्ण रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का उद्देश्य केवल एक रक्षा समीक्षा नहीं है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो भारत किस तरह से नीतिगत और कूटनीतिक रूप से प्रतिक्रिया देगा। मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक बाजारों पर प्रभाव जैसे मुद्दों की भी समीक्षा बैठक में शामिल होगी, ताकि घरेलू स्तर पर संभावित प्रभावों को भी समय रहते टाला जा सके।

CCS बैठक के साथ ही भारत ने पहले से ही विदेश मंत्रालय के माध्यम से भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है, खासकर वे जो क्षेत्र में फंसे हुए हैं। कांग्रेस, सामाजिक और धार्मिक संगठनों सहित कई समूहों ने सरकार से कहा है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाव के लिए त्वरित कदम उठाए। भारत की विदेश नीति की संतुलन-भरी भूमिका इस बीच फिर से सामने आई है, और सरकार देश की सुरक्षा तथा वैश्विक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।

इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे विश्व में तनाव और अस्थिरता की स्थितियाँ बनी हुई हैं, और भारत की भूमिका एक जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में देखी जा रही है। CCS बैठक के निर्णय भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीति को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं, जिससे न केवल भारत बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को भी लाभ मिलेगा।

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