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ओमान में पीएम मोदी के भव्य स्वागत पर पाकिस्तानी विशेषज्ञ की तीखी प्रतिक्रिया

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नई दिल्ली/मस्कट — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे के दौरान प्राप्त भव्य और ऐतिहासिक स्वागत ने न सिर्फ भारत-ओमान के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती दी है, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इतनी चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। ओमान की राजधानी मस्कट में मोदी को ‘मैत्री पर्व’ और औपचारिक कार्यक्रमों में जिस उत्साह और सम्मान के साथ स्वागत मिला, उसे लेकर पाकिस्तान के कुछ विशेषज्ञों ने कड़े और आलोचनात्मक बयान दिए हैं, यह दर्शाता है कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और स्वीकार्यता बढ़ने से पाकिस्तान तनाव महसूस कर रहा है।

पाकिस्तानी विशेषज्ञ कमर चीमा ने कहा है कि ओमान में प्रधानमंत्री मोदी को जो प्रतिष्ठित स्वागत मिला है, वह पाकिस्तान को कई स्तर पर परेशान कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया का यह भी कहना है कि मुस्लिम देशों के बीच भारत को इतनी सराहना और कद मिले, यह पाकिस्तान के लिए स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि वह हमेशा चाहता रहा है कि मुस्लिम दुनिया भारत को केवल कश्मीर जैसे विवादों की नजर से ही देखें। चीमा के अनुसार पाकिस्तान की यह मानसिकता है कि मुस्लिम-देशों के बीच भारत की स्वीकार्यता से वह खुद कमजोर पड़ रहा है।

कमर चीमा ने विस्तार से बताया कि मोदी की ओमान यात्रा सिर्फ ऐतिहासिक सम्मान या स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक और सामरिक हितों का गहरा ढांचा है। उन्होंने कहा कि ओमान और भारत दोनों के हित सुरक्षा और समुद्री रणनीति से जुड़े हैं क्योंकि भारत का लगभग 40 प्रतिशत तेल का आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है, और ओमान इसी मार्ग के प्रवेश-निकास बिंदुओं पर स्थित है। इसके अलावा वह दूकम पोर्ट जैसे समुद्री संसाधनों के कारण भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है, जो हिन्द महासागर तथा अरब सागर में लॉजिस्टिक पहुंच और सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर सकता है।

चीमा ने यह भी कहा कि भारत-ओमान सहयोग में नौसेना की साझेदारी, समुद्री सुरक्षा निगरानी और संयुक्त गश्ती जैसे प्रयास हैं, जो भारत को सुरक्षा-प्रोड्यूसर (net security provider) के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। वह पाकिस्तान के लिए इस बात को खतरे की घंटी मानते हैं कि भारत अब सिर्फ व्यापार या सांस्कृतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि स्ट्रेटेजिक रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी मुस्लिम-देशों के साथ गहरा जुड़ाव बना रहा है।

पाकिस्तानी विशेषज्ञ के अनुसार, ओमान की ग्लोबल गैट कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) में अपनी तटस्थ भूमिका और भारत-इज़राइल के साथ संबंध भी पाकिस्तान के दृष्टिकोण में चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि जहां भारत मध्य-पूर्व में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है, वहीं पाकिस्तान को लगता है कि उसकी खुद की भूमिका और प्रभाव कम होता जा रहा है, खासकर उन मुस्लिम देशों में जहाँ भारत ने सामाजिक और आर्थिक सहयोग की मजबूत भूमिका निभाई है।

विश्लेषकों का कहना है कि ओमान यात्रा और भारत-ओमान के रिश्तों में बढ़ोतरी सिर्फ सम्मान समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक और सुरक्षा-सहयोग ढांचे का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी को ओमान का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से नवाज़ा जाना भी इस बदलते वैश्विक राजनीतिक संतुलन का प्रतीक माना जा रहा है।

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