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दिल्ली में Vladimir Putin की ऐतिहासिक यात्रा — भारत–रूस रिश्तों में नई डील, रक्षा-ऊर्जा से लेकर व्यापार तक

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4–5 दिसंबर 2025 को होने वाले 23वें India–Russia Annual Summit के अवसर पर रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की भारत यात्रा ने पहले से ही कूटनीतिक, रक्षा-और आर्थिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह दौरा उनके लिए यूक्रेन युद्ध के बाद भारत आने वाला पहला औपचारिक दौरा है, और दोनों देशों के बीच रिश्तों को “गुणात्मक नई ऊँचाई” देने की उम्मीद जताई जा रही है।

दोनो देशों की बैठकें केवल दोस्ताना मुलाकात नहीं — बल्कि समय के हिसाब से रणनीतिक मायने भी रखती हैं। रूस ने यात्रा से पहले ही एक मुख्य सैन्य–लॉजिस्टिक समझौता — Reciprocal Exchange of Logistic Support (RELOS) — पारित कर दिया है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं, युद्धपोतों और वायुसैनिक प्लेटफार्मों को एक दूसरे के लॉजिस्टिक सहायता देने का कानूनी आधार मिल गया है। यह समझौता रक्षा-संबरद को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

दक्षिण एशिया एवं वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच संतुलन बनाए रखने की नज़र से, इस दौरे में कई बड़े समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है — जिनमें शामिल हैं:

दौरे का कार्यक्रम भी गहराई से तय किया गया है: 4 दिसंबर की शाम दिल्ली आगमन, निजी रात्रिभोज, और 5 दिसंबर को राष्ट्रपति भवन में स्वागत, followed by राजघाट में श्रद्धांजलि के बाद हैदराबाद हाउस में शिखर बैठक — जहाँ दोनों देश इन मसलों पर आगे की रूप-रेखा तय करेंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि यह दौर सिर्फ एक यात्रा भर नहीं, बल्कि दोनों देशों के लिए “जोखिम प्रबंधन, सप्लाई-चेन सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता” बनाने का अवसर है। वर्तमान वैश्विक अस्थिरता, सैन्य संतुलन, ऊर्जा संकट और बढ़ते रणनीतिक दायित्वों के बीच ये कदम दोनों देशों की सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए लिए जाने की संभावना है।

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