उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतापगढ़ की पहचान लगातार मजबूत होती जा रही है। अब इस जिले से एक और नाम संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की आगामी राज्यसभा सीटों के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा को अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर वह चुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचते हैं तो प्रतापगढ़ से जुड़े सांसदों की संख्या छह हो जाएगी। फिलहाल जिले से दो लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसदों का संबंध है।
बीजेपी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। पार्टी की सूची में राधाकांत ओझा के अलावा धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। मौजूदा संख्याबल के आधार पर बीजेपी सात सीटों पर मजबूत स्थिति में मानी जा रही है, जबकि आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है।
राधाकांत ओझा मूल रूप से प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र से आते हैं और लंबे समय से कानून के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर दो बार रह चुके हैं। 2015-16 और 2022-23 के दौरान उन्होंने बार एसोसिएशन का नेतृत्व किया था। हालिया बार चुनाव में उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए फिर से चुनाव लड़ा, हालांकि इस बार वह तीसरे स्थान पर रहे।
ओझा ने वर्ष 1987-88 के आसपास इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी और करीब चार दशक से कानूनी क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2013 से वह हाई कोर्ट के नामित वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। बार की राजनीति में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है और वह लंबे समय तक अधिवक्ताओं से जुड़े संगठनात्मक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
राधाकांत ओझा का राजनीतिक जुड़ाव भी पुराना बताया जाता है। वह बीजेपी के आजीवन सदस्य रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उनके बारे में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी और आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं के कानूनी मामलों में भी पैरवी की है। इसके अलावा वह बीजेपी के काशी क्षेत्र के विधि एवं कानूनी कार्य विभाग में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
राधाकांत ओझा का परिवार भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके बड़े भाई शिवाकांत ओझा प्रतापगढ़ के रानीगंज से विधायक रहे हैं और उत्तर प्रदेश की अलग-अलग सरकारों में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। यही वजह है कि ओझा परिवार का प्रतापगढ़ की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव माना जाता है।
राधाकांत ओझा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रतापगढ़ को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। इस जिले से मौजूदा समय में लोकसभा सांसद शिवपाल सिंह पटेल और कौशांबी से पुष्पेंद्र सरोज का संबंध है, जबकि राज्यसभा में इमरान प्रतापगढ़ी और प्रमोद तिवारी जैसे नाम जिले से जुड़े हुए हैं। ऐसे में ओझा के चुनाव जीतने पर प्रतापगढ़ से जुड़े सांसदों की संख्या छह हो सकती है।
बीजेपी की इस सूची को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी देखा जा रहा है। पार्टी के आठ उम्मीदवारों में अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। राधाकांत ओझा का चयन खास तौर पर प्रयागराज और पूर्वांचल क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन के पीछे अलग-अलग कारणों का कोई विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा जारी नहीं किया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 6 अक्टूबर तक पूरी होनी है और मतदान 16 अक्टूबर को होगा। उत्तर प्रदेश की जिन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें बीजेपी के कई मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में पार्टी ने इस बार कई नए चेहरों को मौका दिया है और राधाकांत ओझा भी उन्हीं प्रमुख नए नामों में शामिल हैं।
कुल मिलाकर, राधाकांत ओझा का राज्यसभा उम्मीदवार बनना उनके लंबे कानूनी करियर के बाद राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला चुनाव में होगा। अगर वह राज्यसभा पहुंचते हैं तो प्रतापगढ़ की राजनीतिक पहचान और मजबूत होगी और यह जिला देश के उन चुनिंदा इलाकों में शामिल हो जाएगा, जहां से एक साथ बड़ी संख्या में सांसदों का संबंध रहा है।
