आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में सैलरीड (नौकरीपेशा) वर्ग के लिए एक “इनफ्लेशन-लिंक्ड सैलरी रिवीजन एक्ट” बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में महंगाई और वेतन वृद्धि के बीच संतुलन नहीं है, जिससे असली आय धीरे-धीरे कम हो रही है।
क्या है मुख्य मांग?
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चड्ढा ने कहा कि 2018-26 के बीच महंगाई के कारण सैलरीड वर्ग की वास्तविक आय लगभग 16% तक घट चुकी है।
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उन्होंने कहा कि Government employees को महंगाई भत्ता (DA) और वेतन आयोग के तहत Automatic Revision मिलता है, लेकिन भारत के बड़े हिस्से के कर्मचारियों के पास ऐसा कोई विधिक प्रावधान नहीं है, जिससे वेतन वृद्धि महंगाई के हिसाब से स्वतः नहीं होती।
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इसलिए उन्होंने एक ऐसा कानून बनाने की मांग की है जो महंगाई के अनुसार वेतन स्वतः एडजस्ट करे, यानी inflation-linked salary revision को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाये।
क्यों यह ज़रूरी?
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चड्ढा का तर्क है कि जब खर्च लगातार बढ़ता है और वेतन स्थिर रहते हैं, तो कर्मचारियों की ख़रीददारी शक्ति घटती है।
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यह कदम उन कर्मचारियों को राहत देगा जिनके पास कोई स्वतः वेतन वृद्धि व्यवस्था नहीं है, जैसे कॉर्पोरेट कर्मचारियों, फैक्ट्री कर्मियों और गिग वर्कर्स को भी शामिल करने की बात उन्होंने कही है।
बजट 2026 पर व्यापक आलोचना:
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इसी मौके पर उन्होंने बजट में इनकम टैक्स स्लैब नहीं बढ़ाये जाने को भी नौकरशाह वर्ग और मध्य-वर्ग के लिए निराशाजनक बताया।
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साथ ही, उन्होंने LTCG टैक्स को हटाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च बढ़ाने जैसी अन्य मांगें भी संसद में रखीं।
